फोटो10सोरोंजी के वाराह मंदिर में भगवान वाराह का पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
सोरोंजी। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष दशमी पर भगवान वराह का अभिषेक किया गया। इस दौरान भगवान वराह के जयकारों से मंदिर गूंज उठा। पंडित नरेश त्रिगुणायत ने भगवान वराह के अभिषेक का महत्व बताया। सुबह भगवान वराह की मंगला आरती के बाद भगवान का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से पंचाभिषेक किया गया। भगवान को मेवा मिष्ठान का भोग लगाया गया। शंख और घंटे की गूंज के बीच भगवान वराह की महा आरती उतारी गई। शाम को भजन-कीर्तन किए गए। अभिषेक के दौरान गोपाल शर्मा, आशुतोष त्रिवेदी, हरिदास, सुमित कुमार आदि मौजूद रहे।