फोटो 25 कासगंज यातायात पुलिस कार्यालय। स्रोत: संवाद
- फोटो : सांकेतिक
कासगंज। जिला बने करीब 18 साल बीत चुके हैं, लेकिन यहां की यातायात व्यवस्था संभालने वाली पुलिस आज भी अपने पक्के दफ्तर के लिए तरस रही है। शहर की सड़कों पर दिन-रात ट्रैफिक कंट्रोल करने वाला यह विभाग खुद सालों से कामचलाऊ और अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है।
जगह की कमी के कारण दफ्तर के जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और जब्त की गई गाड़ियों को खड़ा करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। साल 2008 में कासगंज को जिला बनाया गया था। इसके बाद से कई सरकारी विभागों को नई इमारतें मिल गईं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस को आज तक अपना खुद का भवन नसीब नहीं हुआ।
फिलहाल यह दफ्तर सोरों गेट के पास पुराने डाकघर के सामने स्वास्थ्य विभाग की एक छोटी सी पुरानी बिल्डिंग में चल रहा है। यहां जगह इतनी कम है कि जरूरी कागजात और फाइलों को संभालना मुश्किल होता है और बारिश के दिनों में यह परेशानी दोगुनी हो जाती है।
सीज किए गए वाहनों को दफ्तर के बाहर या दूसरी जगहों पर असुरक्षित खड़ा करना पड़ता है। आज के समय में बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है। ऐसे में विभाग को सभी आधुनिक सुविधाओं वाले एक स्था दफ्तर की सख्त जरूरत है, जिससे रिकॉर्ड के रख-रखाव और आम जनता की समस्याओं को सुलझाने में आसानी हो सके।