फोटो 30 - अमांपुर शमशान घाट पर पिता को मुखग्नि देती बेटी। स्रोत : संवाद
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कासगंज। बेटियां अब पहले की तरह नहीं रहीं। यह रूढि़यों को तोड़कर बेटों की तरह फर्ज निभा रही हैं। अमांपुर कस्बे की आयुषी ने ऐसी ही सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह कर मिसाल कायम की है। पहले अपने पैसों से पिता का इलाज कराया। निधन हुआ तो श्मशान पहुंचकर मुखाग्नि दी।
अमांपुर कस्बे के मोहल्ला गांधीनगर में बुधवार को परंपराओं के बीच बेटी ने जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की नई राह दिखाई। यहां लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे सुनील कुमार (56) पुत्र रामगोपाल का निधन हो गया था। परिवार में बेटा नहीं है। ऐसे में छोटी बेटी आयुषी ने पिता के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। श्मशान घाट पहुंचकर हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया।
सुनील कुमार पिछले तीन-चार महीनों से गंभीर रूप से बीमार थे। आर्थिक स्थिति कमजोर है। इससे इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। परिवार में पत्नी अनीता गोयल और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी प्रैंसी गोयल का विवाह हो चुका है। छोटी बेटी आयुषी दिल्ली में नौकरी करती है। वह अपनी कमाई से माता-पिता की मदद करती थी। बीमारी के दौरान उपचार और घर की जरूरतों के लिए दिल्ली से आर्थिक सहयोग भेज रही थी।
पिता के निधन की सूचना पर वह दिल्ली से अमांपुर पहुंची। अंतिम संस्कार के असमंजस को उसने हाैसले से दूर किया। बेटे की तरह रस्में पूरी कीं। इस दाैरान लोगों की आंखें नम हो गईं।