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Kasganj News: जिले के पहले हाईटेक पॉलीहाउस में रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती

Sun, 30 Nov 2025 01:55 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
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फोटो16कासगंज में एक पॉली हाउस में तैयार की जा रही पीली ​रंग की शिमला मिर्च ।संवाद
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कासगंज। जिले में अब आधुनिक खेती की ओर युवाओं के कदम बढ़ रहे हैं। आधुनिक खेती के आकर्षण में युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं और उद्योग के रूप में खेती करने की चाह बनी हुई है। एक युवा अभय तायल ने जिले में पहला हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित किया है। इसमें रंगीन शिमला मिर्च की खेती हो रही है। रामबाग कॉलोनी निवासी कॉमर्स ग्रेजुएट अभय तायल ने इस दिशा में प्रयास शुरू किया है। अभय के पिता विनीत तायल शहर के प्रमुख उद्यमी हैं, लेकिन अभय के मन में कुछ नया करने का सपना था तो उसने कृषि के क्षेत्र को चुना। बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने नोएडा के इंस्टीट्यूट से आधुनिक कृषि तकनीकी शिक्षा का प्रशिक्षण लिया। एग्रीकल्चर के क्षेत्र में रूचि होने पर अभय ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत गोरहा गांव में 4 एकड़ जमीन पर हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित किया। इसमें हरी, लाल और पीली शिमला मिर्च की खेती शुरू की। अभी वह सेमी ऑर्गेनिक पद्धति पर शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। उनका लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों में इसे पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती में बदलना है।
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तकनीक आधारित कृषि का उदाहरण:यह पॉलीहाउस कासगंज जिले में टेक्नोलॉजी आधारित कृषि का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है। पॉलीहाउस तकनीक की मदद से वह फसल के लिए आदर्श तापमान, नमी और प्रकाश को नियंत्रित करते हैं। इससे पारंपरिक खेती की तुलना में न केवल बेहतर उत्पादन हो रहा है, बल्कि फसल में रोग लगने का खतरा भी काफी रहता है।विनीत तायल ने बताया कि पॉलीहाउस में एक एकड़ में करीब 18 से 20 टन शिमला मिर्च का उत्पादन होने का अनुमान कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है। उन्होंने बताया कि अभी कासगंज मंडी में ही शिमला मिर्च बिक रही है। उत्पादन बढ़ने पर दिल्ली, लखनऊ और आगरा जैसे बड़े बाजारों में इसकी बिक्री की जाएगी। उन्होंने बताया कि शिमला मिर्च के बाद आगे चलकर पॉलीहाउस में बिना बीज वाले खीरे की खेती की योजना है।युवा अभय तायल का कहना है कि खेती अब उद्योग का रूप ले चुकी है। आधुनिक खेती के माध्यम से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनका पाॅली हाउस देखने के लिए लोग आते हैं और जानकारी लेते हैं। इसी तरह से युवा उन्नत खेती के लिए प्रेरित होंगे और आगे बढ़ेंगे।
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