फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kasganj News: कृषि वैज्ञानिकों ने आलू किसानों को किया सावधान, लग रहा रोग

Fri, 05 Dec 2025 11:52 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
विज्ञापन
फोटो17डॉ.अंकित सिंह भदौरिया, कृषि वैज्ञानिक,  कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा कासगंज।स्रोत:स्वयं
विज्ञापन
कासगंज। जिले में 5 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में किसान आलू का उत्पादन करते हैं। आलू का उत्पादन जिले में सब्जी की खेती में सर्वाधिक है, लेकिन आलू की फसल काफी संवेदनशील है। फसल में कई तरह के रोगों का प्रकोप तेजी से फैलता है। लेट ब्लाइट (पछेती झुलसा) नामक रोग आलू की फसल में लगने में पूरी फसल चौपट हो जाती है। इस रोग की पहचान और निदान पर कृषि वैज्ञानिकों ने एडवाइजरी जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक फफूंदनाशकों के सही उपयोग से इस रोग को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। आलू की फसल में लेट ब्लाइट रोग फायटोप्थोरा इन्फेस्टांस नामक कवक के कारण पनपता है। जो नमी और आर्द्रता के साथ तेजी से सक्रिय होता है। सर्दी में लगातार बादल छाने, कोहरा और हल्की बारिश से यह और भी तेजी से पनपता है। फसल रोगग्रस्त होने की स्थिति में पौधे की पत्तियों पर काले धब्बे होने से झुलसने जैसे हो जाती हैं। पत्तियों की निचली सतह पर रूई जैसे सफेद फफूंद के गुच्छे और तने पर काले धब्बे हो जाते हैं। साथ ही कंदों में सड़न और काले भूरे धब्बे पड़ने लगते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के कृषि वैज्ञानिक डॉ अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि जिन खेतों में रोग नहीं आया है उनमें 0.2 प्रतिशत मैंकोजेब की 2 ग्राम प्रति लीटर मात्रा का छिड़काव करना चाहिए। यह स्प्रे रोग की रोकथाम हेतु बेहद जरूरी है। यदि फसल में शुरुआती रोग के लक्षण दिखाई दें तो 3 ग्राम प्रति लीटर साइमोक्सेनिल और मैंकोजेब का घोल अथवा 3 ग्राम प्रति लीटर फेनामिडोन और मैंकोजेब का घोल अथवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर मेटालेक्सिल और मैंकोजेब के घोल में से कोई भी उपाय किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त फसल चक्र अपनाकर लंबे समय तक एक ही खेत में फसल को न करें। उर्वरकों का खेत में संतुलित प्रयोग ही करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें