कासगंज। यदि स्तन में गांठ है और दर्द महसूस नहीं हो रहा है, तो भी इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। स्तन कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर दर्द या गंभीर परेशानी महसूस नहीं होती है।
इस कारण महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर जांच कराने में देरी कर देती हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजू के अनुसार, यदि इस बीमारी की पहचान शुरुआती दौर में ही हो जाए, तो उपचार के परिणाम काफी बेहतर मिल सकते हैं।
डॉ. अंजू ने बताया कि स्तन कैंसर कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होता है। बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास और कुछ हार्मोनल कारक इसका जोखिम बढ़ा सकते हैं, हालांकि बिना किसी स्पष्ट जोखिम कारक के भी यह समस्या हो सकती है।
पैथोलॉजिस्ट डाॅ. वंदना यादव के मुताबिक, किसी भी गांठ या संदिग्ध बदलाव की सटीक वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी है। एफएनएसई जांच के माध्यम से इस रोग की पहचान संभव है।
इसके अलावा चिकित्सीय सलाह पर मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड, जरूरत पड़ने पर एमआरआई और बायोप्सी कराकर बीमारी की पुष्टि की जाती है। केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर तय नहीं किया जा सकता। बीमारी की अवस्था के आधार पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसे उपचार अपनाए जाते हैं।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
-स्तन या बगल में नई गांठ
-स्तन के आकार या बनावट में बदलाव
-त्वचा पर गड्ढे पड़ना या लालिमा आना
-निप्पल का अंदर की ओर मुड़ जाना
-निप्पल से असामान्य या रक्तयुक्त स्राव होना
वर्जन
जिला अस्पताल में महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राम व एमआरआई की सुविधा नहीं है। कई अन्य जांचों की व्यवस्था अस्पताल में उपलब्ध है। - डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
फोटो 16 डॉ. अंजू। संवाद