कासगंज। सिकंदराराऊ के टीकरी कलां गांव में रहने वाली कमलेश के पांच बेटे हैं। पति डालचंद्र की 24 साल पहले मौत हो चुकी है। उन्होंने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए पांचों बेटों को पाला पोसा। उनकी शादियां कीं।
परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि हर किसी की आंखें नम हो गईं। एक साथ तीन बेटों के शव देखकर मां कमलेश बेसुध होकर बार-बार रोते हुए गिर जा रही थीं। परिवार की तमाम महिलाएं उन्हें संभालती और ढांढस बंधाती रहीं। वह बार-बार अपने जिगर के टुकड़ों को याद करके फफक पड़ती। भाई शीलेंद्र ने बताया कि हादसे ने उनके परिवार को पूरी तरह उजड़ दिया। भाइयों के बीच में काफी प्यार था। वह मैनपुरी में पीएसी में तैनात है, जबकि तीनों भाई गांव में रहकर खेती करते थे और परिवार का ध्यान रखते थे। भाइयों को याद करके उनके आंसू नहीं थम रहे थे।
नहर किनारे लगा रहा लोगों का तांता
रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार सुबह शुरू होने से पहले नहर किनारे परिजन समेत गांव के अन्य लोगों का तांता लगा रहा। परिजन भाइयों की बरामदगी के लिए पीएसी और गोताखोरों के साथ नहर किनारे डटे। जब एक के बाद एक करके उनके शव नहर से बाहर आने शुरू हुए तो चीत्कार मच गया। संवाद