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तुलसी का जीवन-आत्माराम हुलसी के पुत्र थे तुलसी

Tue, 13 Aug 2013 05:33 AM IST
Kasganj
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सोरों (ब्यूरो)। श्रावण शुक्ला सप्तमी आज ही के दिन संवत 1554 वि. में सोरों के मोहल्ला योगमार्ग निवासी पंडित आत्माराम दुबे के घर तुलसी ने जन्म लिया था। जन्म लेते ही माता हुलसी चल बसी। कुछ समय बाद ही उनके पिता का भी देहांत हो गया। दादी ने लालन पालन किया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण तुलसी गंगा किनारे घूम घूमकर भिक्षा मांगने लगे। गुरु नरहरिदास ने तुलसी का लालन पालन कर अपनी पाठशाला में पढ़ाया। संस्कृत का प्रकांड विद्वान बनकर तुलसी जगह-जगह श्रीराम का गुण गान करने लगे। गंगा के दूसरी पार स्थित ग्राम बद्रिकापुरी के पंडित दीनबंधु पाठक ने तुलसी की ख्याति सुनकर अपनी कन्या रत्नावली का विवाह उनके साथ कर दिया। उनके तारक नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ। लेकिन उसका अल्पायु में ही निधन हो गया। पुत्र क ी मृत्यु के बाद तुलसी को विरक्ति हो गई और वह घर छोड़कर चले गए। जनपद बांदा में राजापुर ग्राम को बसाकर वहां मंदिर बनाकर तुलसीदास रहने लगे। चित्रकूट, काशी आदि स्थानों पर प्रवास कर तुलसीदास ने रामचरित मानस जैसे अमरग्रंथ की रचना करके रामकथा को जन-जन तक पहुंचाया। संवत 1680 में श्रावण शुक्ला सप्तमी को ही 126 वर्ष की आयु में उन्होंने काशी घाट पर अपनी देह त्याग दी।
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