भवन में विवि के कुछ चुनिंदा अधिकारियों का ही आना-जाना होता था। विवि में काम करने वाली एजेंसियों को कब-कब कितना कितना पैसा दिया गया है, एसटीएफ इसकी भी पड़ताल कर रही है। वहीं, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में 2021 और 2022 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया पर कल्याणपुर निवासी डॉ. घनश्याम मिश्रा ने सवाल उठाए हैं।
इनका आरोप है कि प्रक्रिया में पहले स्थान पर आए थे। प्रोफेसरों ने तीन लाख रुपये मांगे थे। पैसा नहीं दिया, तो चयन नहीं किया गया। कमीशनखोरी में फंसे विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के कार्यकाल में हुईं नियुक्तियों में अब अनियमितता के आरोप लगना शुरू हो गए हैं। डॉ. घनश्याम ने अक्तूबर 2021 में निकली भर्ती में प्रतिभाग किया था। उनका कहना है कि 20 अक्तूबर को परीक्षा की औपचारिकता पूरी की गई।
इन्होंने विवि के दो प्रोफेसरों पर तीन लाख रुपये की मांग करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाया कि पैसा नहीं दिया था, उसी दिन शाम पांच बजे ही तीन दावेदारों की नियुक्ति करा दी गई थी। इसके बाद 2022 में निकली भर्ती में आवेदन के बाद 21 अगस्त को लिखित परीक्षा हुई, जिसमें 110 अंकों के साथ पहले स्थान पर था। लेकिन कम अंक लाने वालों की भर्ती हो गई, लेकिन उनको नियुक्ति नहीं दी गई।