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पंडी जी के जाते ही ताल ठोकने लगे लोग

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कानपुर। विकास दुबे और उससे जुड़े लोगों का सफाया होने के बाद उसके गांव विकरु में अब एक एक नई राजनीति शुरू हो गईं है। गांव में जो भी सार्वजनिक कार्य बिना किसी विरोध के पूरा हो जाता था अब उसने आरोप-प्रत्यारोप और खींचतान शुरू हो गई। पहले विकास दुबे जिसे बगरू गांव के लोग पंडित जी के नाम से जानते हैं किधर के वजह से कुछ भी बोल नहीं पाता था, अब वह सभी लोग अपने अपने अधिकार को लेकर एक दूसरे के सामने आने लगे हैं। इसका सबसे ताजा उदाहरण गांव के किनारे बनाई जा रही एक संपर्क मार्ग में जिन जिन लोगों की जमीन जब तक विकास दुबे का दबदबा था, तब तक उस संपर्क मार्ग का निर्माण बिना किसी रूकावट के होता गया। जैसे ही विकास दुबे कांड का अंत हुआ उस संपर्क मार्ग को लेकर आपस में तकरार शुरू हो गई है। लोगों की आपसी तकरार में बात बात में यह भी कहा जाने लगा है कि अब पंडित जी नहीं रहे कि आकर सब को धमका देंगे, अपनी जमीन में अब हम रास्ता नहीं निकलने देंगे। इसी तरह के तमाम मामले होने लगे है। ------- गांव के 20 प्रतिशत लोग दुखी बाकी खुश कानपुर। गांव के कुछ बुजुर्ग जो अभी भी इस घटना से सहमे हुए हैं इसके बावजूद धीरे-धीरे पुरानी बातें बताने लगे हैं। पता चला है कि गुरु ग्राम सभा में कुल 12 सीटर है और करीब 3:30 हजार की जनसंख्या है जिसमें से 20% लोग ऐसे हैं जो विकास दुबे के जाने से दुखी हैं बाकी 80% लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि जो हुआ अच्छा हुआ। --------- जिसे पंडी जी चाहते थे वही बनता था प्रधान कानपुर। बात-बात में गांव वालों ने बताया कि विकरू और आसपास की 10 ग्राम सभाओं में ग्राम पंचायत के चुनाव में विकास दुबे जिसे चाहता था, वही प्रधान पद का उम्मीदवार होता था और उसी की जीत होती थी। इसलिए जब चुनाव होता था तो चुनाव में कौन खड़ा होगा इसे लेकर गांव में कोई हलचल ही नही होती थी। गाँव वालों का कहना है कि अबकी पंचायत का चुनाव घमासान वाला होगा। बहुत से लोग भरे बैठे है कि इस बार परधानी लड़ेंगे। साथ मे यह भी कहते है कि अब तो पंडी जी का डर भी नही है। ------- हर महीने नहीं बंटता था कोटे का राशन कानपुर। विकरू और इसके आसपास की कई ग्राम सभाओं में कोटे का राशन हर महीने नहीं बांटा जाता था। ऐसा क्यों होता था, यह सवाल गांव वालों से करने पर लोग बताने लगे कि पंडी जी से पूछने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी। बताया कि अगर पंडी जी होते तो इस महीने भी राशन नही मिलने वाला महीना था।लेकिन अब राशन मिलना शुरू हो गया है। एक कोटेदार सुरजन सिंह ने बताया कि अब गाँव मे स्थिति सामान्य है। एक मुस्लिम बिरादरी के बुजुर्ग ने पूरी कहानी तो बताई, जब उनका नाम पूछा तो उन्होंने हाथ जोड़ लिया।
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