माई सिटी रिपोर्टर आदर्श त्रिपाठी कानपुर। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के अधिशासी अभियंता रहे संजय तिवारी को शासन ने पदावनति (डिमोशन) कर सहायक अभियंता बना दिया है। शासन ने सामान्य श्रेणी के लिए पद न रहते हुए भी 1998 में की गई पदोन्नति को नियमानुसार न मानते हुए इसे रद्द कर दिया है। बृहस्पतिवार को जारी शासनादेश में तिवारी को सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर वापस कर दिया। प्रमुख सचिव आलोक कुमार की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक वर्ष 1998 में 6 सहायक अभियंता में से सामान्य वर्ग के 3, अनुसूचित जाति वर्ग के 1 अभ्यर्थी को अधिशासी अभियंता (सिविल) के पद पर प्रोन्नति की संस्तुति की गई थी। सामान्य वर्ग का एक पद कोर्ट के स्टे के कारण खाली रखा गया था। बाकी 2 पदों पर आरके श्रीवास्तव व संजय तिवारी को प्रभारी अधिशासी अभियंता का प्रभार सौंपा गया था। सामान्य वर्ग के पद पर कोर्ट का स्टे 2001 में खारिज होने के बाद इस पर आरके श्रीवास्तव को प्रोन्नति प्रदान की गई। रोस्टर के मुताबिक अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी को अगली प्रोन्नति मिलनी थी, किंतु इस वर्ग का अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं था। सामान्य श्रेणी का पद न होने के बावजूद 1998 की डीपीसी के अनुसार वर्ष 2003 में तिवारी को अधिशासी अभियंता के पद पर प्रोन्नत कर दिया गया। तत्कालीन यूपीएसआईडीसी में डीपीसी की संस्तुति की वैधता अवधि सार्वजनिक उद्यम विभाग की मॉडल सेवा नियमों के मुताबिक 1 वर्ष तक ही मान्य होने का उल्लेख किया गया है। शासन में 1998 की डीपीसी की संस्तुति के परिपेक्ष में वर्ष 2003 में की गई प्रोन्नति को नियम विरुद्ध होने के कारण रद्द कर दिया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक विभाग में अभियंताओं के बीच जारी खींचतान के चलते शासन मामले की शिकायत की गई। इस पर करीब 17 वर्षों बाद यह फैसला लिया गया है।