एक अफसर के मुताबिक करीब पौने 200 ट्रकों का संचालन करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनी के एक ट्रक में मार्च में लगी एचएसआरपी जून में टूट गई। इतनी जल्दी टूटी नंबर प्लेट का कारण पूछने पर दुर्घटना बताई गई। हकीकत यह है कि नंबर प्लेट बदलने में ये टूट रही हैं। मतलब ये लोग ओवरलोड टैक्स से बचने के लिए दूसरे नंबरों की फर्जी प्लेट लगा लेते हैं। इसके बाद चालान दूसरों के पास पहुंचता है।
फास्टैग के मैसेज और स्टेटमेंट से पकड़ें गलती
अगर किसी ट्रक मालिक को लगता है कि उसके ट्रक का चालान गलत हुआ है। वह फास्टैग का विवरण निकालकर उस गलती को पकड़ सकता है। चालान के मैसेज की तारीख देखें और फिर उस तिथि में टोल प्लाजा शुल्क के आए फास्टैग मैसेज के विवरण से मिलान करें।
अगर उस तारीख में वाहन के संबंधित रूट पर गाड़ी के न जाने की पुष्टि हो जाए तो शिकायत आरटीओ ऑफिस में सबूत के साथ करें। इससे मुख्यालय में बनी अपर परिवहन आयुक्त की कमेटी से चालान को निरस्त कराया जा सके।
फास्टैग जीपीएस आधारित होता है। अगर किसी वाहन का चालान टोल पर बिना उधर से गुजरे हो गया है तो प्रमाण पेश करने पर परिवहन विभाग की कमेटी के पास मामला जाएगा। साबित होने पर उसका चालान निरस्त कराया जा सकता है।- राजेश सिंह, आरटीओ प्रवर्तन, कानपुर नगर
केस: एक
नौबस्ता की प्रीति कुशवाहा ने एआरटीओ सुधीर वर्मा को बताया कि उनके पिता धर्मेंद्र कुमार ट्रक चलाते हैं। जीवन भर ट्रक चलाया औैर अब पुराना ट्रक खरीद लिया है। उनके पिता कभी अलियापुर टोल से नहीं गए लेकिन उनका 40 हजार रुपये का चालान हो गया। उन्हें पता भी नहीं और जब तहसील से आरसी कटी तो पता चला। अब ऑफिस के चक्कर काट रही हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हेे रही है। उन्हें सलाह दी गई कि उनके पिता कोई ऐसा प्रमाण दें, जिससे पता चले कि चालान के दिन उनकी गाड़ी वहां नहीं थी, तो चालान निरस्त हो सकता है।
केस: दो
अनिल कुमार का ट्रक एफसीआई में अनाज लाने ले जाने के लिए संबद्ध है। उन्होंने बताया कि उनका ट्रक शहर में कोपरगंज माल गोदाम से लेकर एफसीआई गोदाम के बीच ही आता जाता है। मानक के हिसाब से अनाज लोड होता है लेकिन उनका अलियापुर टोल से 30 हजार रुपये का चालान हो गया है। अब वह इसको वापस कराने की कवायद कर रहे हैं।