तीसरी बार किशनपुर सीट पर सुरेंद्र की जीत
यमुना किनारे बसे किशनपुर नगर पंचायत के मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी पर अपना विश्वास जताया और सुरेंद्र सोनकर को अपना अध्यक्ष चुना है। ऐसे में सुरेंद्र सोनकर के परिवार ने अध्यक्ष पद पर हैट्रिक लगाई है। पहले सुरेंद्र सोनकर की मां और फिर सुरेंद्र और इस वर्ष भी सुरेंद्र ने यह चुनाव जीता है।
किशनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। यहां से भाजपा ने अपना प्रत्याशी निवर्तमान चेयरमैन सुरेंद्र सोनकर को बनाया था। सुरेंद्र सोनकर वर्ष 2017 में निर्दलीय चुनाव जीते थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। वर्ष 2012 में उनकी मां भी चेयरपर्सन रह चुकी है। इस तरह से पिछले दस वर्ष से चेयरमैन सीट सुरेंद्र सोनकर के परिवार में थी। वर्ष 2023 में तीसरी बार चुनाव जीतकर अपना दबदबा कायम रखा है। सुरेंद्र सोनकर को चुनाव में 1896 वोट प्राप्त हुए जबकि सपा प्रत्याशी रत्ना सिंह 1443 वोट। इस तरह 453 वोट से सुरेंद्र सोनकर ने चुनाव में जीत हासिल की है। किशनपुर से बसपा प्रत्याशी को कुल 25 और कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 42 वोट प्राप्त हुए।
रिकाउंटिंग को लेकर भाजपाइयों ने दिया धरना
सदर नगर पालिका के चुनाव में पराजित भाजपाइयों ने धरना दिया। अस्पताल चौराहा जीटी रोड पर करीब 40 मिनट धरना देकर प्रशासन पर सपा के इशारे पर मतगणना में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया। सरकार से एसपी के तबादले की मांग की। सदर नगर पालिका के चुनाव की अंतोगत्वा प्रशासन को परिणाम घोषित करना पड़ा। दो चरणों तक आगे चले भाजपा प्रत्याशी के कारण भाजपाई खासा खुश दिखे।
तीसरे चरण की मतगणना में सपा के बढ़त बनाने के बाद भाजपाइयों के माथे में पसीना आने लगा। चौथे चरण की घोषणा के पहले प्रत्याशी स्वयं पंडाल में ही धरने पर बैठे। प्रशासन की मानमनौव्वल के बाद धरना समाप्त हुआ। शाम सात बजे सपा के पक्ष में चुनाव परिणाम घोषणा होते ही भाजपाइयों ने पहले मतगणना पंडाल पर धरने पर बैठने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बैठने नहीं दिया। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार द्विवेदी, भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह ने समर्थकों के साथ चरक या अस्तपताल चौराहे पर धरना दिया। इस दौरान काफी हंगामा भी किया, लेकिन बाद में उन्हें धरना समाप्त करना पड़ा।