यात्री की शिकायत सुनकर तत्काल बोगी की मरम्मत होती तो दुर्घटना को रोका जा सकता था
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कानपुर के पास पुखरायां में हुए इस भीषण रेल हादसे की प्रथमदृष्टया जांच में पता चला है कि पटरी की गड़बड़ी नहीं बल्कि एस-1 बोगी में मैकेनिकल फॉल्ट था। जिसके कारण एक-एक करके कुल 14 डिब्बे डिरेल हो गए। रेलवे का संरक्षा विभाग ट्रेनों की बोगियों की मरम्मत को लेकर एक्टिव रहता तो शायद इतनी बड़ी दुर्घटना न होती। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने मेंबर रोलिंग स्टॉक को हादसे के लिए जिम्मेदार बोगी के तकनीकी कारणों की वहीं मेंबर इंजीनियरिंग को पटरियों की हालत की जांच कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब की है। सबसे पहले एस-1 बोगी पटरी से उतरी। इस बोगी में सफर कर रहे एक यात्री को काफी समय से तेज झटका लगता महसूस हो रहा था। उसने झांसी स्टेशन पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन इस शिकायत पर किसी रेलवे अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने तकनीकी गड़बड़ी की वजह से ट्रेन हादसे के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित कर दी है। 24 घंटे में जांच रिपोर्ट देने को कहा है। वहीं इस मामले पर केवल उत्तर प्रदेश सरकार ही नहीं, मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार अपनी नजरें गड़ाये हुए है। जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसका बचना मुश्किल है।