कानपुर देहात। मड़ौली कांड का पीड़ित युवक बुधवार सुबह जिलाधिकारी के पास फरियाद लेकर पहुंचा। यहां उसने नौकरी की मांग रखी। जिलाधिकारी ने उसकी फरियाद सुन आश्वासन दिया। इसके बाद वह बाहर निकल आया और परिसर में जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर मौजूद कर्मचारियों के हाथ पैर फूल गए। सुरक्षा कर्मियों ने अधिकारियों को जानकारी देकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर उसकी हालत में सुधार है।
रूरा थाना क्षेत्र के मड़ौली निवासी कृष्णगोपाल दीक्षित का छोटा बेटा अंश दीक्षित (24) बुधवार सुबह 11 बजे के करीब कलक्ट्रेट पहुंचा। उसने जिलाधिकारी आलोक सिंह से घटना में अब तक मिले मुआवजे व अन्य लाभ दिलाए जाने की मांग रखी। इसके बाद सरकारी नौकरी की मांग करने लगा। इस पर मौजूद अधिकारियों ने भी उसे समझाया और आश्वासन दिया कि सरकार से जो भी नियमानुसार कार्रवाई है की जा रही है। जिलाधिकारी ने परियोजना निदेशक व अन्य अधिकारियों को बुलाकर दिए जाने वाले लाभ संबंधित दिशा निर्देश दिए। इसके बाद अंश बाहर निकल आया। प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारियों के अनुसार कुछ देर वह परिसर में ही खड़ा रहा और इसके बाद जेब से कुछ निकाल कर खा लिया। इसके बाद वह उल्टियां करने लगा। कर्मचारियों ने पूछा तो उसने जहरीला पदार्थ खाने की बात कही। इसकी जानकारी पर कलक्ट्रेट में अफरा तफरी मच गई। तत्काल अंश को पुलिस कर्मियों के साथ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पर कोतवाली प्रभारी अकबरपुर सतीश सिंह, रूरा थाना प्रभारी कपिल दुबे भी जा पहुंचे। कुछ देर पिता कृष्ण गोपाल भी जा पहुंचा। पुलिस ने अंश से जानकारी की। इमरजेंसी में मौजूद डॉ. श्रीप्रकाश ने अंश का उपचार शुरू किया। डॉ. श्रीप्रकाश ने बताया कि जहरीला पदार्थ खाने से हालत बिगड़ने पर अंश को पुलिस लेकर आई थी। उसका इलाज किया जा रहा है। हालत में सुधार है।
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वर्जन...
युवक सुबह मिलने के लिए पहुंचा था। उसने जो भी समस्याएं बताई उसे अधिकारियों को बुलाकर अवगत करा दिया गया। कई बार पहले भी आवास व नौकरी दिलाने की मांग के लिए आ चुका है। नियमानुसार जो भी लाभ मिलने चाहिए थे वह दिए जा चुके हैं। उसे आउटसोर्सिंग पर नौकरी दी गई है, उसके भाई को भी मुख्यमंत्री आवास दिए जाने की बात कही गई है। अब वह अधिक रुपयों की नौकरी मांग कर रहा है। उसने बताया था कि वह घर से कुछ खाकर आया है, इसके बाद उसे अस्पताल भेजा गया। - आलोक सिंह, जिलाधिकारी
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यह था मामला...
कानपुर देहात। कलक्ट्रेट में तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा जैन 13 फरवरी को जन सुनवाई कर रही थीं। उसी दौरान मड़ौली गांव के कुछ लोग डीएम कार्यालय पहुंचे। उन लोगों ने डीएम से गांव के ही कृष्णगोपाल दीक्षित के खिलाफ ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा करने की शिकायत की। इस पर डीएम ने शिकायती पत्र पर एसडीएम को मौके पर जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। दोपहर में एसडीएम मैथा ज्ञानेश्वर प्रसाद, लेखपाल अशोक सिंह के अलावा राजस्व व पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। राजस्व विभाग की टीम ग्राम समाज की जमीन को खाली करा रही थी। उसी दौरान कृष्णगोपाल दीक्षित की झोपड़ी में एकाएक आग लग गई। इस हादसे में कृष्णगोपाल दीक्षित की पत्नी प्रमिला दीक्षित (45) और बेटी शिवा (22) की जलकर मौत हो गई थी। घटना ने खूब तूल पकड़ा। इस मामले में लेखपाल, थानाध्यक्ष, एसडीएम समेत कई पर रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। परिवार के लोग तब से कई अलग- अलग मांगे करते चले आ रहे हैं।