सीट बेल्ट लगी होने से कन्हैया बाल-बाल बच गए। जैसे तैसे वह कार से बाहर निकले। इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हाइड्रा मंगाकर कार को बाहर निकलवाया है। साथ ही, पुल पर संकेतांक लगवा रही है।
संकेतांक और डिवाइर न बनने से हो रही घटनाएं
पुल का निर्माण पीडब्ल्यूडी विभाग करा रहा है। सिंचाई विभाग ने दिसंबर महीने तक पानी रोका है। इसी समयावधि में काम भी पूरा कराना है। इससे काम तेजी से चल रहा है। निर्माणाधीन पुल के दोनों ओर कोई संकेतांक या फिर डिवाइडर न होने से लगातार घटनाएं हो रही हैं।
चार जुलाई को हुई थी चचेरे भाईयों की मौत
इसके पहले तीन जुलाई की रात कानपुर से लौटते समय इसी पुल के पास पुरवा निवासी आशीष बाजपेई की भी कार अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई थी। उसमें आशीष और उनके चचेरे भाई विकास की मौत हो गई थी। विभागीय अधिकारियों ने संकेतांक बनाने के लिए कहा था, लेकिन अब तक न कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया और न स्पीड ब्रेकर ही बनाया गया।