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Kanpur News: पुलिस ने बरती कदम-कदम पर लापरवाही

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कानपुर। गोविंदनगर थाना क्षेत्र में 28 सितंबर को लापता हुई एलएलबी छात्रा का दो अक्तूबर को रेलवे लाइन किनारे झाड़ियों में शव मिला तो उसकी मौत हत्या है या हादसा यह सवाल खड़ा हो गया। छात्रा की तलाश से लेकर शव मिलने और पोस्टमॉर्टम तक पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल जरूर उठ गए हैं। पहले जहां से लापता हुई वहां के दादानगर चौकी इंचार्ज ने लापरवाही बरती इसके बाद घटनास्थल रतनलालनगर चौकी क्षेत्र के दरोगा ने शव मिलने के बाद ट्रेन हादसा लिख दिया। पुलिस की ऐसी चूक नहीं है। छह साल पहले बर्रा के संजीत हत्याकांड में भी शुरुआती जांच और कार्रवाई में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई थी।
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पुलिस की चूक, एक नजर में


सूचना मिली, तलाश ठंडी रही
- 28 सितंबर को गुमशुदगी की सूचना के बाद भी पुलिस की तलाश में तेजी नहीं दिखी।
परिवार खुद खोजता रहा - परिजन खुद सीसीटीवी और रेलवे लाइन का इलाका खंगालते रहे।
सीडीआर तक नहीं निकलवाई
- छात्रा के मोबाइल की सीडीआर तक नहीं निकलवाई गई।
चप्पल मिली, फिर भी गंभीरता नहीं
- रेलवे लाइन किनारे चप्पल मिलने की सूचना पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
विरोध के बाद पहुंची पुलिस
- परिजन के विरोध करने के बाद पुलिस पहुंची और झाड़ियों से शव बरामद हुआ।
शव मिला, मौत को हादसा मान लिया
- मौत का कारण स्पष्ट होने से पहले ही पंचायतनामा में ट्रेन दुर्घटना दर्ज कर दी गई।
गलत एंट्री से पोस्टमॉर्टम अटका
- ट्रेन हादसा दर्ज होने के कारण परिजन ने मामला संदिग्ध बताया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में भी अड़चन आई।
दूसरा पंचायतनामा भी देर से पहुंचा
- संशोधित पंचायतनामा दोपहर 2:15 बजे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा।
परिजन को करनी पड़ी पैनल की मांग
- हत्या की आशंका के बीच परिजन के दबाव के बाद डॉक्टरों के पैनल और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया।
एफआईआर के बाद भी गिरफ्तारी नहीं
- हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
सबूत जुटाने में भी चूक -छात्रा के सिर के बाल घटनास्थल से पहले नहीं लिए गए। डॉक्टर की आपत्ति के बाद टीम दोबारा मौके पर गई।
संजीत कांड से नहीं लिया सबक -
संजीत हत्याकांड में भी पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, विवेचना और मामले से जुड़े घटनाक्रम को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
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