पेसमेकर घोटाले के सरगना डॉ. समीर सर्राफा के खिलाफ जांच जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सैफई। पेसमेेकर घोटाले के आरोपी डॉक्टर समीर सर्राफा के खिलाफ जांच जारी है। गुणवत्ताविहीन पेसमेकर लगाए जाने अपने पिता को खोनेवाले राजस्थान के इंदल सिंह ने शिकायती पत्र में बताया कि डॉक्टर समीर ने नाम बदल उसके पिता का इलाज किया था। गलत इलाज से उनकी मौत हो गई। वहीं, मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर के लिए जारी एक पत्र में यह भी कहा गया कि वह निजी प्रैक्टिस में अभी भी संलिप्त है।
मेडिकल कॉलेज के कॉर्डियोलॉजी विभाग में कार्यरत डॉक्टर समीर सर्राफ ने मरीजों को गुणवत्ताविहीन पेसमेकर एसजीपीजीआई की तय कीमत से कई गुना अधिक दामों पर लगाया था। एक मरीज की शिकायत पर 2019 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने भ्रष्टाचार पाया। इसमें तय कीमत से नौ गुना अधिक कीमत वसूलने की अनियमितता पाई गई।
विवि प्रशासन की ओर से फरवरी 2022 में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शासन से भी राज्य स्तरीय जांच टीम गठित कराई गई। इसमें विश्वविद्यालय के कैथ लैब में एक से डेढ़ साल का सामान उपलब्ध होने के बावजूद डॉ. सर्राफ और संलिप्त अन्य लोगों की ओर से वर्ष 2019 में करीब एक करोड़ मूल्य की अनावश्यक चीजें खरीदने के आरोप सही पाए गए।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच में धांधली की पुष्टि के बाद भुगतान भी रोका था। यह भी आरोप लगाया गया कि डॉ. समीर सर्राफ ने कई पीड़ित मरीजों से धोखाधड़ी कर गलत पेसमेकर लगाया और अनुचित तरीके से अधिक मूल्य वसूला है। तहरीर में यह भी आरोप है कि डॉक्टर समीर ने सपरिवार नियम विरुद्ध कई अनधिकृत विदेश यात्राएं भी कीं। जिन कंपनियों को इन्होंने लाभ दिलाया उन कंपनियों ने डॉक्टर को तमाम अन्य लाभ भी दिए।
सप्लायर की गिरफ्तारी पर पीड़िता ने खुशी जताई
सैफई। मैनपुरी निवासी रेनू चौहान ने बताया कि 24 सितंबर 2019 को पति चेतन चौहान की तबीयत खराब होने पर मेडिकल कॉलेज ले गए थे। जहां कार्डियोलॉजी विभाग में मौजूद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समीर सर्राफ ने पति को भर्ती कर लिया था। 26 सितंबर को पेसमेकर लगाया और 27 सितंबर 2019 छुट्टी कर दी। डॉक्टर ने दो लाख रुपये लिए थे। इसके बाद डॉक्टर लगातार बीमार पति को एक मेडिकल स्टोर पर बुलाया करता था। जहां दवाई का पर्चा लिखा करता था। वह दवाई भी वहीं पर मिलती। जब वह अपने पति को कानपुर दिखाने के लिए गई तो वहां पर पता चला कि उसके पति के नॉन एमआई पेसमेकर डला हुआ है। काफी शिकायत की लेकिन हमारे विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक नहीं सुनी थी। जब उसे जानकारी हुई कि सप्लायर की गिरफ्तारी हो गई तो उसे बहुत खुश हुई। इन्हीं आरोपियों की वजह से उसका घर बर्बाद कर दिया था।
डॉक्टर को दो बार पहले भी हटाया जा चुका था
डॉक्टर समीर सर्राफ पर मार्च 2021 में विश्वविद्यालय के हृदय रोग विभाग में सस्ते पेसमेकर मरीजों को लगाने सहित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगा था। मामले में तत्कालीन कुलपति प्रो. डाॅ. राजकुमार ने 20 मार्च 2021 को समीर सर्राफ को निलंबित कर दिया था। शासन ने इसकी एक जांच कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने को कहा था। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉक्टर प्रभात सिंह ने 29 जुलाई 2022 को इसी की बैठक में मरीज का हित को ध्यान में रखते हुए बहाल कर फिर से डाॅ.को कार्डियोलॉजी का विभाग अध्यक्ष बना दिया था। इसके बाद चार जनवरी 2022 को आनन-फानन में ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने डाॅ. को भिभागाअध्यक्ष से हटा दिया था।