फोटो संख्या 19 अपहरण के आरोपियाें की पिटाई करते ग्रामीण। वीडियो ग्रेब
सिविल लाइन क्षेत्र के नगला नगोली के बालक का अपहरण का प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। छह माह पहले किसान ने अपनी जमीन ढाई करोड़ रुपये की बेची है। इसकी भनक पास के आरोपी युवकों को लग गई थी। तब से ही वह मनीष और अभिषेक किसान भूरे के परिवार के बारे में जानकारियां जुटाने में लग गए थे। लगातार रेकी के बाद भूरे के बेटे के अपहरण और उसके बाद डेढ़ करोड़ की फिरौती के रुपये मिलते ही बालक की हत्या तक की योजना बना डाली थी।
नगला नगोली के किसान भूरे सिंह ने छह माह पहले सात बीघा जमीन ढाई करोड़ रुपये की बेची है। इस बात की चर्चा उसके गांव के साथ ही आसपास के क्षेत्र में भी हो गई थी। पुलिस जांच पड़ताल के बीच आरोपियों ने बताया कि इस बीच ही यह जानकारी जसवंतनगर के एक फार्मेसी कॉलेज में नर्सिंग छात्र मनीष और शेयर बाजार में रुपये लगाने वाले उसके दोस्त अभिषेक को पता चल गई थी। तभी दोनों को लालच आ गया था और उन्होंने किसी भी तरह से एक बड़ी रकम किसान भूरे से वसूलने का मन बना लिया था। लगभग पांच माह से दोनों युवक भूरे के पूरे परिवार की रेकी कर रहे थे। भूरे, उनके बच्चों, पत्नी समेत परिवार के अन्य लोगों के जाने-आने का समय। कौन-कौन किस समय घर रहता है। कौन बाहरी लोगों से ज्यादा संबंध हैं। यह सब जानकारी जुटाने के बाद युवकों ने सबसे छोटे बेटे मयंक के अपहरण के योजना बनाई। इस बीच ही एक सप्ताह पहले उनकी दोस्ती गांव के ही एक दोस्त के जरिए एक लड़के से हो गई। आरोपियों ने उसे भी योजना में शामिल करके बुधवार सुबह घटना को अंजाम देने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता ने उनके प्रयास को विफल करके पकड़ लिया।
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बेटे के साथ दो बेटियां भी पढ़ती हैं स्कूल में
भूरे ने बताया कि वह चक्की पर भी काम करते हैं। किसान की दो बेटी रुचि और श्रष्टि भी मयंक के साथ एक ही स्कूल में पढ़ती हैं। दोनों बेटियां साइकिल से स्कूल जाती हैं। बुधवार को रुचि की तबीयत ठीक न होने पर श्रष्टि अकेले साइकिल से स्कूल गई थी। किसान की पत्नी सरिता ने बेटे मयंक को तैयार करके स्कूल भेजा था।
बड़ी गाड़ी के शौक पूरे करने के लिए ऑटो से अपहरण का किया प्रयास
मनीष जसवंतनगर क्षेत्र के ही एक कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा था। मेडिकल से जुड़ी पढ़ाई करने के बीच ही उसे डॉक्टरों के पास बड़ी-बड़ी गाड़ी, मोबाइल आदि देखकर भी जल्दी इन सब शौकों को पूरा करने की धुन चढ़ गई थी। उसका दोस्त अभिषेक भी शेयर में रुपये लगता था ऐसे में बड़ी रकम मिलने की इच्छा उसकी भी बनी हुई थी। दोनों ने इन्हीं शौकों को पूरा करने के लिए ऑटो से अपहरण करने का प्रयास किया था।
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देवदूत बनकर आए ग्रामीणों ने बचाई मयंक की जान
भूरे ने बताया कि मयंक के चिल्लाने पर ग्रामीण ऑटो के पीछे दौड़ पड़े। बदमाशों को घेर लिया। पकड़े गए आरोपियों को वह नहीं जानते हैं। आरोपी मनीष नर्सिंग का छात्र है। पूछताछ में उसने बताया कि मयंक की फिरौती के लिए डेढ़ करोड़ रुपये मांगने की फिराक में थे। बताया कि देवदूत बनकर आए ग्रामीणों ने लगभग चार सौ मीटर दौड़कर मेरे बच्चे की जान बचाई है। प्रभारी निरीक्षक यशवंत सिंह का कहना है कि बदमाश बच्चे की हत्या भी कर सकते थे। बड़ी घटना होने से बच गई। साजिश में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाकर जांच की जा रही है।