कानपुर। गांव में जातिगत रूप से मारपीट, लड़ाई झगड़े में अपनी जाति का पक्ष लेकर लड़ने वाला विकास दुबे धीरे धीरे जातिगत संगठनों की आपसी टकराव में मोहरे के रूप में इस्तेमाल होने लगा।उसका यह दुस्साहस तब और बढ़ गया जब उसे राजनेताओं का संरक्षण मिलने लगा। विकास को मिलने वाले राजनीतिक प्रश्रय ने उसे बात बात में मारपीट करने वाले युवक से भस्मासुर बना दिया। विकास को राजनीतिक संरक्षण देने वाले नेताओं की लंबी लिस्ट है। इसकी शुरुआत उसके क्षेत्र चौबेपुर के विधायक रहे हरिकिशन श्रीवास्तव के साथ से शुरू हुई। हरिकिशन श्रीवास्तव और संतोष शुक्ला विधानसभा चुनाव में अलग-अलग पार्टियों से आमने-सामने थे। हरिकिशन के साथ चलने वाला विकास दुबे उन्हें हर स्तर से समर्थन करता था।चुनाव में हरिकिशन की जीत के बाद विकास दुबे से विरोधियों का टशन और बढ़ गया। बताते हैं कि यह विरोध आगे चलकर इतना ज्यादा बढ़ा की हरिकिशन के प्रतिद्वंदी संतोष शुक्ला का उसने दिनदहाड़े मर्डर कर दिया। इसके बाद तो एक के बाद एक बड़े नेता उसे अपने साथ रखने के लिए मौका ढूंढने लगे। यूं कहें कि वह धीरे-धीरे बड़े नेताओं की मजबूरी बनता चला गया। इन नेताओं में कांग्रेस, बसपा, सपा और भाजपा सभी के नेता शामिल हैं। आज भी उसे बहुत से राजनीतिक नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। कहा जा रहा है कि बसपा सरकार में मंत्री रहे और वर्तमान में भाजपा से विधायक, भाजपा सरकार की एक पूर्व मंत्री, पहले बसपा फिर कांग्रेस सांसद बने एक पूर्व सांसद जैसे बहुत से नाम है जो विकास को और उसके अपराधों पर पर्दा डालते हुए उसका दुस्सहास बढ़ाते रहे। इतना ही नहीं कई जातिगत संगठनों में अभी भी वह शिरोमणि के रूप में सम्मानित किया जाता है। ऐसे संगठनों को वह पूरी तरह से धन और बल से सहायता भी करता है। यही वजह है कि विक्ररू की घटना के बाद जब एक तरफ प्रदेशभर की पुलिस उसे खोजने में जुटी है तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे संगठन और ऐसे कुछ लोग हैं जो सोशल मीडिया के जरिए जातिगत आधार पर उसका समर्थन करने में भी जुटे हैं।