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Irfan Solanki Case: कमिश्नरी में अफसरों की फौज, तब भी 24 दिन से फरार हैं सपा विधायक, हाईटेक पुलिसिंग भी फेल

Fri, 02 Dec 2022 10:58 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कमिश्नरी में अफसरों की फौज और सात हजार से अधिक पुलिस बल तैनात है। इसके बावजूद 24 दिन से सपा विधायक इरफान और उनके भाई रिजवान सोलंकी फरार हैं। मामले में हाईटेक पुलिसिंग की भी पोल खुल गई है।
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इरफान सोलंकी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर कमिश्नरी में भारी भरकम पुलिस बल है। आईपीएस व पीपीएस अफसरों की फौज है। हैरानी इस बात की है कि ये मिलकर पिछले 24 दिन से एक विधायक को पकड़ नहीं पा रहे हैं। आरोपी विधायक आगे-आगे चल रहे हैं और पुलिस उनके पीछे-पीछे।

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इसलिए अब तक सिर्फ नाकामी हाथ लगी है। गंभीर मामले में विधायक की गिरफ्तारी न हो कर पाना कई सवाल खड़े करता है। कमिश्नरी पुलिस में 14 आईपीएस तैनात हैं। जिसमें ट्रेनी आईपीएस से लेकर एडीजी तक के रैंक के अफसर हैं। 21 पीपीएस अफसर हैं।
ये एडीसीपी व एसीपी के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा दरोगा, सिपाही, इंस्पेक्टर व हेड कांस्टेबल की संख्या करीब सात हजार है। विधायक को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच भी लगाई गई है लेकिन इतने सारे अफसर व पुलिस बल एक विधायक व उसके भाई को पकड़ नहीं पाए।

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कदम-कदम पर विधायक ने दी मात
आठ नवंबर को विधायक पर जाजमऊ में केस दर्ज हुआ। केस दर्ज होने के छह घंटे बाद पुलिस ने विधायक के घर पर दबिश दी थी। दबिश से पहले ही इरफान फरार हो गए थे। यानी उनको दबिश की जानकारी हो गई थी। दूसरे दिन वह खुलेआम लखनऊ में प्रेसवार्ता करते नजर आए। पुलिस की एक टीम शहर से लखनऊ पहुंची।

तब तक विधायक वहां से निकल गए। उसके बाद एक दिन ग्वालटोली में ही विधायक नूरी शौकत के घर रहे, लेकिन पुलिस नहीं पहुंच सकी। जब वह यहां से निकले, दिल्ली पहुंचे और वहां हैदराबाद पहुंच गए। तब पुलिस उनके पीछे पीछे वहां तक पहुंची। इससे समझिए कि किस तरह से विधायक ने कदम कदम पर पुलिस को मात दी।

हाईटेक पुलिसिंग की भी खुली पोल
नौ नवंबर को इरफान सोलंकी अपने मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे। मीडियाकर्मियों व अन्य तमाम लोगों ने उन्होंने अपने तीन वीडियो बयान व्हाट्सएप पर भेजे थे। उसी दिन दोपहर एक बजकर 10 मिनट पर प्रेसवार्ता संबंधी एक नोट भेजा था।
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इसमें जानकारी दी गई थी कि उनके परिवार वाले प्रेसवार्ता करेंगे। सवाल है कि जब उनका मोबाइल एक्टिव था, वह व्हाट्सएप चला रहे थे तो पुलिस क्या कर रही थी। एक तरह से हाईटेक पुलिसिंग की पोल खुल गई। न ट्रेस कर सकी और न ही पकड़ सकी।
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