कानपुर। जो बात ‘अमर उजाला’ ने सबसे पहले कही, जनता ने बार-बार मानी मगर स्थानीय पुलिस अफसर आंख-कान बंद किए रहे, वही बात आखिर सच साबित हो गई। हम बात कर रहे हैं बर्रा एसओ जयवीर सिंह यादव की कार्यप्रणाली की, उनकी बेकुसूरों को फंसाने की शर्मनाक हरकत की जिसने पुलिस की छवि पर बट्टा लगा दिया। मामला जनता नगर पुलिस चौकी के सामने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में हुई लूटपाट का था। लुटेरों की तो हवा तक नहीं मिली लेकिन बर्रा पुलिस ने आईजी, डीआईजी, एसएसपी सबको धोखे में रखकर एक निर्दोष को जेल भेज दिया। ‘अमर उजाला’ ने सबसे पहले यह मामला उठाया, जनता समर्थन में आ गई, अंदरखाने पुलिस के अफसर भी मानते रहे कि एसओ ने गलत किया लेकिन शहर पुलिस के अफसर अन्याय का साथ देते रहे और एसओ पर कार्रवाई नहीं की। बैंक लूट के बाद भी बर्रा क्षेत्र में ताबड़तोड़ अपराध होते रहे और एसओ समेत थाने के सभी पुलिसकर्मी सोते रहे। गुरुवार को मुख्य सचिव और तमाम आला अफसरों के सामने झूठ और कपट की गठरी खुल गई और एसओ की गठरी बंध गई। मुख्य सचिव ने बर्रा एसओ की कार्यप्रणाली से नाराज होकर उनसे थाना छीन लिया।