सिख विरोधी दंगे की जांच में जुटी एसआईटी ने दबौली में हुई सात लोगों की हत्या में तीन और आरोपियों को बुधवार रात गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों की पहचान बी ब्लॉक पनकी निवासी चंद्र प्रताप सिंह (65), गुड्डू उर्फ अनिल निगम (74), और दबौली निवासी रामचंद्र पाल (66) के रूप में हुई है। केस में यह छठवीं गिरफ्तारी है।
31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में शहर में 127 सिखों की हत्या कर दी गई थी। एसआईटी डीआईजी बालेंदु भूषण ने बताया कि दंगे के वक्त दबौली में विशखा सिंह उनकी पत्नी सरनकौर, बेटी गुरुवचन सिंह, बेटे जोगेंद्र, गुरुचरन, छत्तरपाल और गुरुमुख सिंह की हत्या की गई थी। गोविंदनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस केस के दो गवाह ही बचे थे। जिनकी गवाही के बाद चंद्र प्रताप सिंह, अनिल निगम और दबौली निवासी रामचंद्र पाल को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसआईटी ने कुछ दिन पहले ही केस में पूर्व पार्षद भरत शर्मा व उसके सगे भाई योगेश शर्मा और कैलाश पाल को जेल भेजा था। एआईटी अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
परिवार को जिंदा जला दिया था
दंगाइयों ने विशाख सिंह के घर पर धावा बोल पूरे परिवार को पहले पीटकर बेहोश कर दिया था। इसके बाद पूरे घर में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी, जिसमें एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी।