कानपुर देहात। झींझक स्टेशन के पास ऊंचाहार एक्सप्रेस से शुक्रवार रात कूद कर जान गवाने वाले किशोर की रविवार को सही पहचान हो सकी। वहीं हमले के आरोप में पकड़े गए आरोपियों की पहचान भी मृतक के दोस्तों के रूप में हुई है। दोपहर दो बजे के करीब चंडीगढ़ हरियाणा से पहुंचे माता-पिता ने चेहरा देख शिनाख्त की। मोर्चरी में बेटे का चेहरा देखते ही बिलखते हुई मां सीमा बोली यही है मेरा रमजान। वहीं पति, पत्नी को ढांढ़स बंधाते हुए सिसकियां भरता रहा।
रविवार सुबह राजीव कॉलोनी सेक्टर-17 पंचकुला हरियाणा निवासी अब्दुल रहमान उर्फ रमाकांत, पत्नी सीमा व पड़ोस में रहने वाली अनामिका, पूजा के साथ झींझक पहुंचे। यहां से वह कंचौसी चौकी गए। चौकी में पुलिस कर्मियों ने रेलवे ट्रैक पर शुक्रवार देर रात मिले शव का हुलिया बताया। इसके साथ ही जीआरपी इटावा द्वारा पकड़े गए दो आरोपियों के बारे में जानकारी दी।
यहां परिवार के लोगों ने बिना शव देखे कुछ भी कहने से मना कर दिया। इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया गया। दोपहर दो बजे के करीब चारो लोग अकबरपुर पहुंचे। यहां पर कंचौसी चौकी के सिपाही राजकुमार की उपस्थिति में मोर्चरी में रखे शव को दिखाया गया। अब्दुल रहमान व सीमा ने मृतक की पहचान बेटे रमजान (17) के रूप में की। शव देखते ही सभी बिलखने लगे। पोस्टमार्टम में मौजूद पुलिस कर्मियों ने ढांढस बंधाया। इसके बाद पोस्टमार्टम हुआ। शाम चार बजे के करीब पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर निकले।
बिगड़ैल था रमजान, मां के मना करने के बाद भी दोस्त से मिलने उन्नाव पहुंचा
कानपुर देहात। जवान बेटे की मौत के बाद मां सीमा व बुजुर्ग पिता अब्दुल रहमान बेसुध नजर आए। दोनों बार बार यहीं कह रहे थे कि उन्हें अभी भी नहीं लग रहा कि बेटे के साथ इतना बड़ा हादसा हुआ है।
पिता ने बताया कि वह मूल रूप से करखना रामपुर गोरखपुर के रहने वाले हैं। करीब 30 साल से परिवार के साथ चंडीगढ़ में रह कर काम करते हैं। उनके साथ परिवार में पत्नी सीमा, बड़ा बेटा अक्षय, बेटी हिना व सबसे छोटा बेटा रमजान रहता था। वहीं मां ने रोते हुए बताया कि सोमवार दोपहर एक बजे के करीब रमजान अचानक से उनके पास आया और हरिद्वार जाने की बात कहने लगा। इस पर वह उसके ऊपर नाराज हुई और कहीं न जाने की बात कहते हुए डाटा भी। मगर रमजान नहीं माना और इसके बाद वह घर से निकल गया।
देर रात उसने मां को फोन कर जानकारी दी कि वह पड़ोस में रहने वाले दोस्त अमन से मिलने उसके गांव तौदकपुर भगवंतपुर उन्नाव जा रहा है। उसने एक दो दिन में वापस आने की बात कही थी। इसके बाद बेटा घर नहीं पहुंचा और शुक्रवार रात एक बजे के करीब उसे पुलिस से बेटे की ट्रेन हादसे में मौत होने की जानकारी मिली। इधर पिता ने बताया कि वह चंडीगढ में रह कर पेंटिंग का काम करता है, बेटा रमजान भी उसके साथ कभी-कभी काम में हाथ बटाता था। इसी से घर का खर्चा चल रहा था।
.........रमजान ने छोड़ दी थी पड़ाई
रमजान की आदते ठीक नहीं थी, घर पर भी वह जिम्मेदारी नहीं निभाता था। कक्षा 7 तक पढ़ाई करने के बाद उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था। मां ने बताया कि बेटा घर में किसी की कही नहीं मानता था। वह जब चाहता था दोस्तों के साथ निकल जाता था। इसको लेकर अक्सर उसे डांट भी पड़ती थी। उसके इसी रवैये ने उसकी जान ले ली। इधर भाई की मौत की जानकारी पर बड़ा भाई अक्षय, बहन हिना व अन्य परिवार के लोग भी बिलखते रहे।
राहुल को नहीं जानता अमन....
ट्रेन में जिस वक्त सिपाही पर चाकू से हमला हुआ उस समय तीन लोग बताए गए थे। वहीं घायल सिपाही अमित के पिता लेखराज निवासी पारसौली थाना नौहझील जिला मथुरा ने भी तीन अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने राहुल निवासी सेक्टर -16 मोली जागरी चंडीगढ़ व अमन निवासी तौदकपुर भगवंतनगर जिला उन्नाव को पकड़ा भी। इनसे पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक हिरासत में अमन ने रमजान को जानने व उसके द्वारा चाकू मारने की बात भी स्वीकारी है। इधर पोस्टमार्टम में पहुंची अमन की बहन पूजा ने बताया कि उसको एक पुलिस कर्मी ने भाई अमन से बात कराई थी। उसने बताया कि रमजान चार दिन पहले गांव आया था। उसके साथ एक लड़का और था उसने अपना नाम राहुल बताया है मगर वह उसे नहीं जानता।
................
तीन दिन उन्नाव में अमन के घर रुका था रमजान
अमन की मां अनामिका ने बताया कि वह पति बुद्धीलाल, बेटे अमन, मयंक, बेटी कोमल, काजल व पूजा के साथ सेक्टर-17 राजीव नगर कॉलोनी चंडीगढ़ में काफी समय से रहते हैं। बेटी पूजा की शादी हो चुकी है। वह मूल रूप से उन्नाव जिले के तौदकपुर भगवंतनगर के रहने वाले हैं। उनके पड़ोस में रहने वाले अब्दुल रहमान व सीमा से उनसे अच्छी जान पहचान है। सभी का घर आना जाना लगा रहता है। बताया कि बेटा केरल में मामा लालू के साथ टायर काटने का काम करता था। वह वहां से लौट आया था। पति बुद्धीलाल दो माह पहले गांव में मकान बनवाने के लिए जा रहे थे, तभी अमन भी उनके साथ चला आया था। जबकि वह सभी चंडीगढ़ में थे। मंगलवार को रमजान बेटे से मिलने के उनके गांव जा पहुंचा। पति से जानकारी पर पता चला कि तीन दिन रमजान अपने एक दोस्त के साथ रुका। शुक्रवार दोपहर रमजान बेटे अमन को लेकर चलने की बात कह निकला था। इस पर पहले अमन अपनी नानी शकुंतला के घर खिरो हरदी लालगंज रायबरेली गया। यहां पर बाइक खड़ी की। इसके बाद रघुराज सिंह स्टेशन से ऊंचाहार में सवार हुए थे। इसके बाद क्या हुआ अमन भी ठीक से नहीं बता पता रहा है।
-
मेरा अमन छूट तो जाएंगा न साहब...
पोस्टमार्टम हाउस में पहुंची अमन की मां अनामिका, बहन पूजा भी रमजान के माता पिता के साथ बदहवाश नजर आए। बहन कभी अमन तो कभी रमजान की बात कह बिलखती रही। मां ने बताया कि पुलिस ने बेटे से फोन पर बात बताई है, बेटा अपने को बेगुनाह बता रहा है। वह एक पुलिस कर्मी से बार-बार यही कहती नजर आई कि मेरा बेटा बेगुनाह है, उसने किसी से कभी झगड़ा नहीं किया, साहब मेरा बेटा छूट तो जाएगा।
कानपुर में किया गया अंतिम संस्कार
अब्दुल रहमान की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। अमन की बहन व मां उसे चंडीगढ़ से लेकर कानपुर देहात के अकबरपुर तक पहुंची थी। इधर अब्दुल रहमान की पत्नी सीमा ने बताया कि उसने घर वालों के मर्जी के बिना अंतरजातीय विवाह किया था। इस पर परिवार के लोग भी साथ नहीं देते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर वह रमजान के शव को चंडीगढ़ लेकर नहीं गए। वहीं शव भी दुर्गंध दे रहा था। इस पर पोस्टमार्टम हाउस से एक वाहन किया। यहां से कानपुर के ईदगाह के पास कब्रिस्तान शव ले गए। जहां पर देर शाम उसे दफन करा दिया गया।