कानपुर देहात। सिकंदरा क्षेत्र में बीस साल पहले ओडिशा की रहने वाली महिला को सोने के सिक्के दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर रुपये हड़पने के दोषी को निचली अदालत ने दोषी माना था। इस मामले में दोषी ने सेशन कोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के बाद सजा को बरकरार रखते हुए सेशन कोर्ट ने दोषी की अपील को खारिज कर दिया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार कटियार ने बताया कि ओडिशा के कंधोमली क्षेत्र फूलबनी नारायणी शाही की रहने वाली कल्पना रानी ने सिकंदरा थाना में 2003 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि वह ओडिशा में रेडीमेड कपड़ों का व्यवसाय करती है। उसके पड़ोस में सिकंदरा क्षेत्र का रहने वाला रघुवीर सिंह साड़ी और कपड़ों का व्यापार करता था। जिस कारण उसकी आपस में बातचीत होती थी। रघुवीर ने उसे बताया कि उसके गांव में एक बूढ़ी महिला के पास पुराने सोने के सिक्के है, जो वह सस्ते दाम में दिला सकता है। उसकी बातों में आकर वह एक लाख 95 हजार रुपये लेकर उसके साथ 22 जून 2003 को सिकंदरा चली आई। सिकंदरा पहुंचने के बाद रघुवीर सिंह ने उसे बिरहाना चौराहा पर रोक दिया और रुपये लेकर सिक्के लाने की बात कही। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोपी की गिरफ्तारी करने के साथ ही उसके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किए थे। मामले की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 18 सितंबर 2021 को आरोपी को दोष सिद्ध करते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही अर्थदंड भी लगाया था। मामले में दोषी ने जमानत पर रिहा होने पर निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की थी। जिसकी सुनवाई अपर जिला जज पंचम दुर्गेश की अदालत में चल रही थी। अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निचली अदालत के आदेश को सही पाते हुए दोषी की अपील को खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखने के आदेश दिए हैं।