फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur: नाले टैप करने का प्रस्ताव अटका, गंगा और पांडु नदी में रोज जा रहा 3.5 करोड़ लीटर गंदा पानी

Mon, 01 Apr 2024 03:28 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
नदी में जा रहा गंदा पानी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कानपुर में नालों को टैप करने और वीआईपी रोड में गंदे पानी का भराव रोकने के लिए तैयार किया गया प्रस्ताव एनएमसीजी में ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस कारण सात नालों से रोज करीब साढ़े तीन करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा और पांडु नदी में जाता रहेगा। इस पानी से गंगा गंदी होती रहेगी।

विज्ञापन


गंगा नदी में बैराज के पास से ही नाले गिरने शुरू हो जाते हैं। बैराज परिसर स्थित अटल घाट के ठीक बगल में परमिया नाला (रामेश्वर नाला) गिर रहा है। इसमें नवाबगंज टीबी अस्पताल के प्रदूषित पानी से लेकर आजादनगर, विकासनगर, शारदानगर तक का गंदा पानी शामिल है। परमिया नाले से भैरोघाट की तरफ करीब दो सौ मीटर आगे बढ़ते ही रानीघाट नाला गंगा को प्रदूषित करते नजर आया। इस नाले से रानी घाट बस्ती के साथ ही कोहना, नवाबगंज, तिलकनगर आदि मोहल्लों का गंदा पानी बिना शोधित हुए गंगा को गंदा कर रहा है। इसी तरह पुराने गंगा पुल से सर्किट हाउस के बीच गोलाघाट नाला, सत्तीचौरा घाट नाला और सर्किट हाउस से छबीलेपुरवा (जाजमऊ) के बीच मेस्करघाट नाला भी गंगा को गंदा करता दिखा।

जल निगम की रिपोर्ट के अनुसार इन नालों से रोज 1.2 से 1.5 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा नदी में प्रदूषण बढ़ा रहा है। गंदा नाला और रफाका नाला से पांडु नदी में रोज करीब दो करोड़ लीटर गंदा पानी पांडु नदी में जा रहा है। इससे इस नदी का पानी काला नजर आने लगा है। यह नदी भी फतेहपुर जिले की सीमा के पास गंगा नदी में मिलती है।

विज्ञापन

67 करोड़ का भेजा गया था प्रस्ताव
सीसामऊ नाले की तरह गंगा नदी में गिर रहे पांच नालों को टैप करने के लिए सवा साल पहले जल निगम ने 67 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन के माध्यम से एनएमसीजी को भेजा था। पर, एनएमसीजी ने पांडु नदी में गिर रहे नालों आदि को भी प्रोजेक्ट में शामिल करते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जल निगम (ग्रामीण) ने गंगा नदी में गिर रहे पांच नालों, पांडु नदी में गिर रहे दो बड़े नालों को टैपिंग करने के साथ ही जलभराव रोकने के लिए आईसीएस बनाने का प्रस्ताव एनएमसीजी को भेजा था।

धूल खा रहा प्रस्ताव
जल निगम के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल अक्तूबर-नवंबर में प्रस्ताव की थर्ड पार्टी आकलन रिपोर्ट एनएमसीजी भेज दी गई थी। पर, वहां से अभी तक प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ है। प्रस्ताव वहां धूल खा रहा है। इस वजह से उक्त समस्या दूर नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री का दावा भी फेल होने की आशंका
डेढ़ महीने पहले जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और करीब 400 करोड़ से नवनिर्मित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) का निरीक्षण करने आए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दावा किया था कि सन् 2025 में प्रयागराज में कुंभ से पहले सभी नाले टैप कर दिए जाएंगे। तब गंगा में गंदा पानी न जाने देने का भी दावा किया था। उनके साथ उत्तर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी थे। पर, हकीकत यह है कि जब एनएमसीजी ने अभी तक नाले टैप करने का प्रस्ताव ही स्वीकृत नहीं किया है तो इन नालों का पानी गंगा और पांडु नदी में जाने से कैसे रोका जा सकता है? उनका दावा फेल होने की आशंका है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें