अवैध कार्यों से अर्जित की थी जमीन
वहां नापजोख की औपचारिकता पूरी करते हुए इस जमीन को कुर्क करने की कार्रवाई की गई। तहसीलदार ने बताया कि यह संपत्ति अवैध कार्यों को अंजाम देकर अर्जित की गई थी। डीएम के आदेश पर कुर्की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। सर्किल रेट से इसकी कीमत 70 करोड़, नौ लाख, 60 हजार रुपये है।
क्रेता व विक्रेता नहीं दे पाए जवाब
जिलाधिकारी ने इस संपत्ति के खरीदार और विक्रेता डॉ. प्रभात कुमार गुप्ता आदि को नोटिस जारी किए थे। इसमें उनसे मांगा गया कि खरीद के दौरान खर्च की गई रकम के बावत अपना पक्ष प्रस्तुत करके साक्ष्य दें। मगर कोई भी इसके साक्ष्य नहीं दे सके। लिहाजा साफ हो गया कि यह बैनामी संपत्ति है।
सिटी मजिस्ट्रेट के अधीन हो संपत्ति
मुकदमे के वादी एकलव्य ने तहसीलदार श्रद्धा पांडेय पर अविश्वास जताया। कहा कि उन्होंने इस जमीन को अपने अधीन रखा है। इसके बाद यदि ग्राम प्रधान को इसका अधिपत्य दिया गया, तो वह न्याय लेने की आगे कार्रवाई करेंगे। इस जमीन का रिसीवर सिटी मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव को बनाया जाए।