कानपुर। संवासिनी गृह में बालिकाओं के गर्भवती होने के प्रकरण पर सभी तथ्यों को शासन और प्रशासन की तरफ से स्पष्ट करने के बावजूद इस मामले को लेकर विरोध कम नहीं हो रहा है। महिला संगठन और राजनीतिज्ञों की तरफ से भी लगातार इस मामले को उठाकर व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महिला संगठनों की मांग है कि इस पूरे मामले की तक जांच की जाए और इन सभी महिलाओं की सुरक्षा की जाए। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की तरफ से लगातार दूसरे दिन भी सवाल खड़े किए गए। समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने मंडलायुक्त डॉ सुधीर एम बोबडे को पत्र भेजकर सवाल भी उठाया है और अनुरोध भी किया है। उनका कहना है कि आश्रय घर की सफाई और संवासिनियों की देखभाल में बहुत कमी रही है। इसी तरह अगर सात गर्भवती संवासिनी बलात्कार की शिकार होने के बाद यहां लाई गई तो क्या गर्भपात का आप्शन उन्हे दिया गया था।जो उनका कानूनी अधिकार है। इन गर्भवती संवासिनियों के स्वास्थ को लेकर प्रबंधकों ने क्या किया। क्योकि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब पता चला है कि एक एचआईवी प्लस और और एक हेपेटाइटिस सी प्लस है। उनकी मांग है कि इन परिस्थितियों में मौजूदा वहां के प्रबंधकों को हटाया जाना चाहिए। साथ ही संवासिनियों से बातचीत करके सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए। इसी तरह महिला समिति की नगर अध्यक्ष नीलम तिवारी और मंत्री सुधा सिंह ने मांग रखी जा कि किसी भी अपराधिक गतिविधि का पता लगने पर त्वरित और सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। सभी गर्भवती और बीमार संवासिनियों के उपचार में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप --राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व सदस्य जूही सिंह ने इस मामले में सरकार को सवाल के घेरे में लिया है। ट्वीट के माध्यम से उनका कहना है कि जब बच्चियां संरक्षण में थी तो यह सब उनके साथ कैसे हो गया। -ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वाली सरकार में बेटियां सुरक्षित नही है। -सांसद सत्यदेव पचौरी ने ट्वीट करके सरकार पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब दिया है। उनका कहना है कि राजनीति के काले नागों अपने कर्कश दांतों से कानपुर की बेटियों को डंसना बंद करो। प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है कि जब ये बेटियां यहाँ आई थी तभी प्रेग्नेंट थीं।