तब दो सीट पर थी भाजपा-बसपा, सपा थी शून्य
पिछले चुनाव में जिले में भाजपा बहुत ज्यादा कमाल नहीं कर सकी थी। छिबरामऊ नगर पालिका और सौरिख नगर पंचायत में ही उसके टिकट पर खड़े हुए उम्मीदवारों को जीत मिली थी। सदर में भाजपा की काफी किरकिरी हुई थी। 2012 में सदर सीट जीतने वाली भाजपा सूबे की सत्ता में होते हुए भी 2017 में सदर सीट पर चौथे नंबर पर रही थी।
13 मई को साफ होगा जनता का संदेश
बसपा को गुरसहायगंज नगर पालिका और समधन नगर पंचायत में कामयाबी मिली थी। सपा का किसी सीट पर खाता भी नहीं खुला था। कन्नौज, तालग्राम, सिकंदरपुर, तिर्वा में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सियासी पार्टियों को पटखनी देकर जीत हासिल की थी। अब इस बार जनता ने क्या संदेश दिया है, यह 13 मई को साफ होगा। साथ राजनैतिक पार्टियों का भविष्य भी तय होगा।
सदर में मची रही गदर, परिसीमन ने बिगाड़ा समीकरण
जिले की आठ सीट में से सदर नगर पालिका की सीट पर खूब सियासी गदर हुआ। यहां एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए सियासी पार्टियों ने खूब तिकड़म किया। इस सीट पर कब्जे के लिए भाजपा ने अपने ही गुट से छिटके निर्दलीय उम्मीदवार को वोटिंग से ठीक 24 घंटे पहले अपने पाले में करके बढ़त लेने की कोशिश की। उसे बसपा के साथ ही पिछली बार की तरह निर्दलीय उम्मीदवार से ही कड़ी टक्कर होती दिख रही है।
नई परिसीमन के चलते बिगड़ा है समीकरण
सियासी जानकार यह भी कह रहे हैं कि कन्नौज नगर पालिका के नई परिसीमन के तहत नए इलाकों के शामिल होने से कईयों का समीकरण ही गड़बड़ा गया है। नए इलाकों के वोटर का साथ हासिल करने के लिए कोशिश सभी ने की, लेकिन वहां से निकला सियासी संदेश ने कईयों के चेहरे की हवाईयां उड़ा रखी हैं। लोगों की जुबान पर भी शहर में शामिल नए इलाकों के वोटर की गतिविधियों की चर्चा रही।