कानपुर में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के पास से बरामद लगभग 200 करोड़ रुपये की नगदी के मामले में अब पीयूष समेत 14 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद की ओर से दाखिल पूरक परिवाद पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) में चार फर्मों व उनके निदेशकों समेत 13 अन्य को आरोपी बनाया गया है। इनमें पीयूष की पत्नी, भाई-भाभी और ट्रांसपोर्टर व सप्लायर शामिल हैं।स्पेशल सीजेएम सुशील कुमार सिंह ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए सम्मन जारी कर सभी को 20 अक्तूबर को कोर्ट में तलब कर लिया है। डीजीजीआई की ओर से हर एक आरोपी के खिलाफ 11450 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई है।
विशेष लोक अभियोजक अम्ब्रीष टंडन ने बताया कि डीजीजीआई के सहायक निदेशक शंभू नाथ सिंह की ओर से कन्नौज स्थित मेसर्स ओडोकेम इंडस्ट्रीज, मेसर्स ओडोस्मिथ आईएनसी की प्रोपराइटर कल्पना जैन, मेसर्स फ्लोरा नेचुरले की प्रोपराइटर विजय लक्ष्मी जैन, पीयूष जैन, अमरीश जैन, महेश चंद्र जैन, कानपुर स्थित मेसर्स त्रिमूर्ति फ्रेगरेंस प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक दीपक अग्रवाल, मैनेजर शैलेंद्र मित्तल, मेसर्स गणपति रोड कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक प्रवीण कुमार जैन, रजत जैन, मुंबई स्थित मेसर्स एस. कुशलचंद इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक सुनील ए. हिरानी के खिलाफ पूरक चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी गई है।
बड़े ट्रांसपोर्टर व पान मसाला सप्लायर भी फंसे
पीयूष मेसर्स ओडोकेम इंडस्ट्रीज में साझेदार है। दो अन्य प्रोपराइटरशिप कंसर्न मेसर्स ओडोस्मिथ आईएनसी की प्रोपराइटर पीयूष की पत्नी कल्पना और मेसर्स फ्लोरा नेचुरले की प्रोपराइटर पीयूष के भाई अम्ब्रीष कुमार जैन की पत्नी विजय लक्ष्मी हैं। तीनों फर्मों का काम पीयूष अपने भाई अम्ब्रीष के साथ मिलकर देखता था। इनके कामकाज में सहयोग करने वाले शहर के बड़े ट्रांसपोर्टर व पान मसाला सप्लायर को भी मुकदमे की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।
ऐसे पकड़ा गया था पीयूष
दरअसल, डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस अहमदाबाद की टीम ने गुजरात में शिखर वालों का पान-मसाला लदा ट्रक पकड़ा था। इसमें जीएसटी चोरी का मामला सामने आया था। इसके बाद टीम ने शहर आकर पान-मसाला कारोबारी और ट्रांसपोर्टर प्रवीण कुमार जैन के यहां छानबीन की थी। जांच में पता चला था कि पीयूष जैन पान-मसाला कारोबारी को फ्रेगरेंस उपलब्ध कराता था। इसके बाद टीम ने 21 दिसंबर 2021 को पीयूष के कानपुर और कन्नौज स्थित घरों में छापेमारी के दौरान लगभग 196 करोड़ रुपये नकद व 23 किलो सोना बरामद किया था।
आठ माह जेल में रहा
डीजीजीआई ने पीयूष पर जीएसटी चोरी का मुकदमा दर्ज किया था, जबकि सोना बरामदगी मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की ओर से सोना तस्करी के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। दोनों मामलों में पीयूष के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है और स्पेशल सीजेएम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। दोनों ही मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर लगभग आठ माह जेल में रहने के बाद पीयूष की जेल से रिहाई हुई थी।
पीयूष पर अब भी लगभग 290 करोड़ रुपये बकाया
विशेष लोक अभियोजक अम्ब्रीष टंडन ने बताया कि पीयूष की फर्म मेसर्स ओडोकेम इंडस्ट्रीज पर लगभग 236 करोड़, मेसर्स ओडोस्मिथ आईएनसी पर लगभग 155 करोड़ व मेसर्स फ्लोरा नेचुरले पर लगभग 75 करोड़ रुपये की कुल जीएसटी वैल्यू निकाली गई थी। पीयूष के पास से बरामद सोने पर जीएसटी वैल्यू लगभग 30 करोड़ निकाली गई। इस तरह से नकद व सोने पर कुल लगभग 497 करोड़ रुपये जीएसटी वैल्यू निकाली गई। पीयूष का लगभग 196 करोड़ रुपये नकद व लगभग 11 करोड़ रुपये का सोना मिलाकर कुल लगभग 207 करोड़ रुपये सीज किया जा चुका है। इस लिहाज से पीयूष को अभी लगभग 290 करोड़ रुपये और चुकाने पड़ सकते हैं।