इसके बाद सात अक्तूबर को लाजपत नगर में दीपक टंडन के पालतू रॉटविलर ने पड़ोसी छात्र सार्थक सेठ पर हमला कर दिया था। इस कुत्ते का पंजीकरण नहीं था। नगर निगम ने इसे जब्त कर लिया। नगर निगम की इसी सख्ती के चलते लोग पिटबुल, रॉटविलर, लेब्राडोर जैसे पालतू कुत्तों को चुपचाप सड़क पर छोड़ने लगे हैं। इन्हें कोई खाना देने वाला भी नहीं है। इससे इनके और हिंसक होने की आशंका है।
विदेशी नस्ल के लावारिस कुत्तों को संरक्षण दे रहे पशु प्रेमी
उम्मीद की किरण संस्था के संस्थापक मयंक त्रिपाठी ने बताया कि सात अक्तूबर को नौबस्ता बंबा के पास पिटबुल सड़क पर मिला था, जिसे उसके मालिक ने छोड़ दिया था। संस्था ने उसका संरक्षण किया। इसी तरह निराला नगर में पीपीएम हॉस्पिटल के पास लावारिस हालत में मिले लेब्राडोर को भी संरक्षित किया गया। उन्होंने पालतू कुत्तों को पंजीकरण कराकर पालने की अपील की है।
पशु प्रेमी संस्था स्ट्रे एड के संचालक आर तिवारी के अनुसार उनके पास रोज 2-3 फोन पालतू कुत्तों को सड़कों पर छोड़े जाने के आते हैं। हमले के मामले सामने आने के बाद कुत्तों को सड़कों पर छोड़ा जा रहा है। पालतू कुत्तों को अचाकन से सड़कों पर छोड़ना न तो कुत्तों के लिए ठीक है और न ही राहगीरों के लिए। इन्हें इनका मालिक जो खाना खिलाता है, ये वही खाते हैं। अब तक 18 पिटबुल और रॉटविलर को संरक्षित किया गया है।
कहां-कब भटकते मिले पालतू कुत्ते
- 7 अक्तूबर : नौबस्ता बंबा के पास पिटबुल लावारिस हालत में मिला।
- 28 सितंबर : आनंदपुरी के पास रात 11:30 बजे लेब्राडोर सड़क पर मिला।
- 27 सितंबर : निराला नगर में पीपीएम हॉस्पिटल के पास लेब्रोडोर मिला।
- 26 सितंबर : श्याम नगर में पिटबुल सड़क पर भटकता मिला।
- 25 सितंबर : हंसपुरम नौबस्ता में दो साल का पिटबुल सड़क पर मिला।
- बर्रा में पिटबुल डॉग के मुंह पर मास्क लगाकर कोई छोड़ गया।
- बर्रा में रॉटविलर एक पोल से बंधा मिला।