विशुनगढ़ में सिपाही सचिन राठी के बलिदान के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। मुनुआ ने जिस बंदूक से सिपाही पर फायर की थी। वह कानपुर की एक दुकान से खरीदी गई थी। बिना लाइसेंस के बंदूक तो नहीं खरीदी होगी। अब पुलिस मुनुआ का लाइसेंस कहां से जारी हुआ है उसकी जांच कर रही है, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस यह पता नहीं लगा सकी है।
विशुनगढ़ के धरनीधीरपुर के हिस्ट्रीशीटर मुनुआ यादव ने बंदूक को कानपुर की एक दुकान से खरीदा था। बताया गया है कि बंदूक वर्ष 1995 में खरीदी गई थी, लेकिन इसे किसके नाम पर खरीदा गया था, यह साफ नहीं हो सका है।
पुलिस ने दुकान का पता तो कर लिया और वहां के कागजातों की जांच में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि अशोक यादव के नाम से जिले में किसी असलहे का लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। ऐसे में उसके घर से बंदूक मिलना संदेह पैदा कर रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि लाइसेंस किसी दूसरी जगह से तो नहीं जारी हुआ, लेकिन उसके पहले बंदूक की खरीद से जुड़े कागज की तलाश की जा रही है।