खुशबू के शहर में सबसे ज्यादा सियासी गदर मची है। कन्नौज जिले की आठ सीट में सबसे ज्यादा हॉट सीट सदर नगर पालिका ही बनी हुई है। पांच ग्राम सभा के जुड़ने से इस नगर पालिका का न सिर्फ दायरा बढ़ गया है, बल्कि वोटर लिस्ट भी लंबी हो गई है।
लोकसभा का चुनाव अगले साल है। अगले साल ठीक इन्ही दिनों में केंद्र की नई सरकार बनाने के लिए सियासी रस्साकशी चल रही होगी। ऐसे में ठीक एक साल पहले हो रहे नगर निकाय के चुनाव में सियासी पार्टियों को अपनी-अपनी सियासी मजबूत का अंदाजा हो जाएगा। यही वजह है कि शहर में भी अपनी सरकार बनवाने के लिए सभी सियासी पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक रखी है।
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कन्नौज को सियासी गलियारे में सत्ता का पावर प्वाइंट कहा जाता है। कभी समाजवाद का गढ़ रहे इस इलाके में अब पूरी तरह से भगवा ब्रिगेड काबिज है। पिछले दो दशक तक सपा के कब्जे में रहा यह इलाका अभी उससे दूर है। पहले लोकसभा चुनाव, उसके बाद विधानसभा चुनाव में सपा के इस गढ़ पर भाजपा का कब्जा हो गया है।
बीच में हुए पंचायत चुनाव के दौरान जिले के सभी ब्लॉकों के प्रमुख की कुर्सी और जिला पंचायत के अध्यक्ष की कुर्सी पर भी भाजपा ही काबिज है। ऐसे में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भगवा खेमा इस कामयाबी को बरकरार रखना चाहता है। यही वजह है कि भाजपा ने निकाय चुनाव में कामयाबी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के सियासी दिग्गज यहां ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने का बिगुल बजा चुके है। इसके लिए भाजपा के दोनों उपमुख्यमंत्री भी यहां जनसभा कर चुके हैं।
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अखिलेश-डिंपल ने संभाला मोर्चा
अपने इस गढ़ को भाजपा के कब्जे से फिर से वापस लेने के लिए सपा का खेमा भी जोर लगाए हुए है। सपा की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने यहां लगातार दो दिन दौरा किया। सभी सीट पर पार्टी के प्रत्याशी के लिए वोट मांगा। पत्नी डिंपल यादव ने भी यहां आकर पार्टी प्रत्याशी के लिए सभा की। देखने वाली बात होगी कि भाजपा और सपा में से ज्यादा सीट पर कौन काबिज होता है। इन दोनों ही पार्टियों को कई सीट पर बसपा से भी टक्कर मिल रही है। बसपा की कामयाबी भी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में दोनों ही पार्टी के सामने चुनौती पेश करेगी।
सदर में मची है गदर
खुशबू के शहर में सबसे ज्यादा सियासी गदर मची है। कन्नौज जिले की आठ सीट में सबसे ज्यादा हॉट सीट सदर नगर पालिका ही बनी हुई है। पांच ग्राम सभा के जुड़ने से इस नगर पालिका का न सिर्फ दायरा बढ़ गया है, बल्कि वोटर लिस्ट भी लंबी हो गई है। यहां दो मुख्य चेहरे पिछली बार की ही तरह फिर से मैदान में हैं। पिछली बार जनता की लहर पर सवार होकर मैदान मारने वाले शैलेंद्र अग्निहोत्री इस बार मां के सहारे फिर से मैदान में हैं। पिछली बार की ही तरह इस बार भी उन्हें उनकी पार्टी भाजपा का साथ नहीं मिला। बगावत का ठप्पा लगाकर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। पिछली बार निर्दलीय ही मैदान में उतर कर दमखम दिखाने वाले पूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी रईस अहमद बसपा के हाथी पर सवार होकर पत्नी कौसर जहां को सामने रखकर फिर से पालिका की कुर्सी पर काबिज होने की जुगत में हैं। उन्होंने खुद को सभासद पद पर निर्विरोध निर्वाचित करवाकर अपनी सियासी सूझबूझ का परिचय भी दे दिया है। वह पहले भी लगातार दो बार बसपा से ही पालिकाध्यक्ष रह चुके हैं। डबल इंजन को ट्रिपल इंजन की ताकत देने की कोशिश में जुटी भाजपा के टिकट से पहली बार यहां के बड़े उद्योगपति घराना मैदान में है। ऊषा दीक्षित को मैदान में उतार कर भाजपा लोकसभा और विधानसभा की ही तरह पालिका में भी कमल खिलाने की कोशिश में जुटी है।