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Auraiya: पहचान मिली न कारोबार बढ़ा, ट्रेनिंग में खर्च हुए करोड़ों, तब भी देशी घी ने नहीं पकड़ी रफ्तार, पढ़ें मामला

Thu, 17 Oct 2024 04:25 PM IST
हिमांशु अवस्थी तारिक इकबाल, अमर उजाला,

सार

Auraiya News: वर्तमान में ओडीओपी के तहत घी का उत्पादन बढ़ाने के लिए नए लोगों को जोड़ने की पहल की जा रही है। विभाग की ओर से इसके लिए पात्र लोगों को चिन्हित कर ट्रेनिंग दिलवाई जा रही है। लोन भी दिलवाया जा रहा है।
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ओडीओपी में शामिल देशी घी का मामला - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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ओडीओपी यानी एक जिला एक उत्पाद। इस योजना के तहत शामिल औरैया जिले का घी का कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ सका है। न ही नए उद्योग शुरू हो सके, जो इस योजना को धरातल पर उतरने की कामयाबी का मुहर लगा सकें। यह हकीकत तब है जब पिछले पांच साल में दो करोड़ से ज्यादा की रकम सिर्फ ट्रेनिंग के नाम पर खर्च हो चुकी है।

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अब जरा आंकड़ों पर नजर डालें। पिछले पांच साल में 1250 लोगों को ओडीओपी के तहत ट्रेनिंग दी गई है। उन्हें ट्रेनिंग के लिए 25 लाख का भत्ता बंट चुका है। ट्रेनिंग ले चुके लोगों को 185 लाख की टूलकिट बंट चुकी है। यानी ट्रेनिंग के दौरान पांच साल में दो करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च हो चुकी है। अब ट्रेनिंग लेने वाले लोग क्या कर रहे हैं, इसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है।
इसी तरह पिछले पांच साल में 225 लोगों ने ओडीओपी के तहत बैंक में लोन के लिए आवेदन किया। उनमें से सिर्फ 76 को ही मंजूरी मिली और उन्हें एक करोड़ 89 लाख रुपये का लोन मिला। करीब दो करोड़ रुपये का लोन कहां खपा और इससे कारोबार को कितनी रफ्तार मिली, इसका भी कोई सटीक लेखाजोखा नहीं है।

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सात साल की कोशिश में खड़ा नहीं हो सका घी उद्योग
गांव-गांव उद्योग धंधे को नई पहचान देने के लिए शुरू हुई ओडीओपी योजना धरातल से दूर है। औरैया जिले के घी को इस योजना में शामिल करने का मकसद तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंख देना था, लेकिन गुजरे सात साल में भी ऐसा हो नहीं सका है। हकीकत यह है कि अब तक कारोबार को रफ्तार नहीं मिल सकी है। पुश्तों से इस कारोबार से जुड़े लोगाें को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नए लोगों को इस कारोबार से जोड़ा नहीं जा सका है।

योजना की चुगली कर रहे सरकारी आंकड़े
दशकों पहले तक औरैया में कुटीर उद्योग के रूप में पहचाना जाने वाला देशी घी का उद्योग जब ब्रांडेड उत्पादों के बाजार में आने से दम तोड़ने लगा तो ओडीओपी से इसे उम्मीद बंधी। गुजरे सात सालों के आंकड़ों पर निगाह डालने से यह साबित होता है कि रकम भले ही खर्च हुए, नतीजा सार्थक नहीं आया।

ट्रेनिंग भत्ता में बंट चुका 25 लाख
ओपीओडी के तहत 10 दिन की ट्रेनिंग लेने वालों को विभाग की ओर से 200 रुपये के हिसाब से दो हजार रुपये का भत्ता भी मिलता है। पिछले पांच साल में 1250 अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग भत्ता के रूप में 25 लाख रुपये बांटा जा चुका है। इसके अलावा ट्रेनिंग देनी वाली एजेंसी को भी इससे ज्यादा रकम को फीस के तौर पर दिया जा चुका है।

टूलकिट में यह है शामिल
विभाग की ओर से 10 दिनों की ट्रेनिंग के बाद हर अभ्यर्थी को एक टूलकिट दिया जाता है। इसमें कड़ाही, भगौना, लैक्टोमीटर, वजन मशीन, गैस भट्ठी, छननी, केन शामिल हैं। इन टूलकिट पर विभाग का करीब 20 हजार रुपये खर्च होता है।

लोन: पिछले पांच साल का लेखाजोखा
2020-21: 27 आवेदन हुआ, 10 को 48.25 लाख का लोन मिला।
2021-22: 57 आवेदन हुआ, 15 को 31 लाख का लोन मिला।
2022-23: 62 आवेदन हुआ, 25 को 52 लाख का लोन मिला।
2023-24: 54 आवेदन हुआ, 16 को 36.75 लाख का लोन मिला।
2024-25: 25 आवेदन हुआ, 10 को 21 लाख रुपये का लोन मिला।

पांच साल में बढ़ती रही ट्रेनिंग, बंटती रही टूलकिट, मिलता रहा भत्ता
2020-21: 150 को ट्रेनिंग, तीन लाख का भत्ता बंटा, 15 लाख की टूलकिट।
2021-22: 250 को ट्रेनिंग, पांच लाख का भत्ता बंटा, 25 लाख का टूलकिट।
2022-23: 250 को ट्रेनिंग, पांच लाख का भत्ता बंटा, 25 लाख का टूलकिट।
2023-24: 300 को ट्रेनिंग, छह लाख का भत्ता बंटा, 60 लाख का टूलकिट।
2024-25: 300 को ट्रेनिंग, छह लाख का भत्ता बंटा, 60 लाख का टूलकिट बंटना है।
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ओडीओपी के तहत घी का उत्पादन बढ़ाने के लिए नए लोगों को जोड़ने की पहल की जा रही है। विभाग की ओर से इसके लिए पात्र लोगों को चिन्हित कर ट्रेनिंग दिलवाई जा रही है। लोन भी दिलवाया जा रहा है। कुछ लोगों ने काम शुरू किया है। जल्द ही बेहतर नतीजा सामने आएगा।  -दुर्गेश कुमार, उपायुक्त उद्योग, कन्नौज
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