कानपुर। माताओं ने शनिवार को संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना के लिए जितिया व्रत रखा। सीटीआई शनि मंदिर में महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने बताया कि यह तीन दिनों का त्योहार है। पहले दिन स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है, जिसमें शुद्ध घी और सेंधा नमक का प्रयोग होता है। दूसरे दिन खुर-जितिया या मुख्य जीवित्पुत्रिका के दिन माताएं पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखती हैं। जितिया की मुख्य पूजा प्रदोष काल में होती है। पूजा में कुश से बनी भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा या पवित्र स्थान का उपयोग किया जाता है। मिट्टी और गोबर से चील व सियारिन की मूर्तियां बनाकर पूजा की जाती है। तोरई के पत्तों का विशेष महत्व है। आटे और गुड़ से बनी ठेकुआ, गुलगुला या पूड़े का भोग लगाया जाता है। व्रती अक्षत-पुष्प लेकर संकल्प करती हैं, भगवान जीमूतवाहन की कथा सुनती हैं और आरती करती हैं। तीसरे दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस दौरान झोर भात, मरुवा की रोटी और नोनी का साग खाने की परंपरा है।