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Kanpur News: माता का कूष्मांडा स्वरूप दिलाता सुख-समृद्धि

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कानपुर। नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की उपासना से सुख-समृद्धि, आरोग्य और उन्नति प्राप्त होती है। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के दीन दयाल शोध केंद्र के आचार्य संगम बाजपेई ने बताया कि मां कूष्मांडा की आराधना मनुष्य को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के साथ लौकिक और पारलौकिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। देवी भागवत पुराण और देवी पुराण में वर्णित कथाओं के मुताबिक जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार छाया हुआ था तब मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए उन्हें सृष्टि की आदि-स्वरूपा और आदिशक्ति माना जाता है। उनका निवास सूर्य मंडल के भीतर बताया गया है। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित हैं। उनका वाहन सिंह है। आचार्य ने बताया कि कूष्मांड का अर्थ कुम्हड़ा भी है। मान्यता के अनुसार मां को कुम्हड़ा अर्पित करने से विजय और समृद्धि प्राप्त होती है। (ब्यूरो)
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