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Hardoi: झोलाछाप के गलत इलाज से जच्चा-बच्चा की मौत, दुकान से बरामद हुआ नवजात का शव, आरोपी महिला फरार

Fri, 30 Aug 2024 05:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई

सार

Hardoi News: टड़ियावां थाना क्षेत्र में झोलाछाप के गलत इलाज से जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। पुलिस ने झोलाछाप की दुकान से नवजात का शव बरामद किया है।
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बंद पड़ी झोलाछाप की दुकान और मृतका नूरजहां - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हरदोई जिले के गोपामऊ कस्बे की छोटी बाजार में झोलाछाप के गलत इलाज से प्रसूता और नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद झोलाछाप महिला परिवार समेत भाग निकली। पुलिस ने झोलाछाप की दुकान से नवजात का शव बरामद किया।

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टड़ियावां थाना क्षेत्र के निहालपुरवा निवासी रिजवान की शादी चार साल पहले शहर कोतवाली क्षेत्र के कन्हईपुरवा निवासी नूरजहां (23) के साथ हुई थी। बुधवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन नूरजहां को गोपामऊ के छोटी बाजार स्थित एक झोलाछाप की दुकान पर ले गए।

झोलाछाप महिला ने सामान्य प्रसव कराने का दावा करते हुए इलाज शुरू किया। शाम को नूरजहां ने पुत्र को जन्म दिया, लेकिन ऑक्सीजन समेत अन्य सुविधाएं न मिल पाने के कारण नवजात की मौत हो गई। इसके कुछ देर बाद नूरजहां की हालत भी बिगड़ गई। परिजनों को इसका पता चला, तो हंगामा किया।

दुकान से नवजात का शव बरामद
हंगामा होते देख झोलाछाप महिला मौके से भाग गई। परिजन नूरजहां को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी बुधवार देर रात पुलिस को दी गई। रात करीब 12 बजे पुलिस टीम ने झोलाछाप की दुकान पर छापा मारकर यहां से नवजात का शव बरामद किया।

पहले भी हुई हैं कई घटनाएं
इसके बाद प्रसूता और नवजात के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे। गोपामऊ न्यू पीएचसी के अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि घटना की जानकारी नहीं है, लेकिन जिस झोलाछाप महिला पर आरोप है। उसके गलत इलाज से पहले भी कई घटनाएं हुई हैं। प्रभारी निरीक्षक टड़ियावां अशोक कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर मिलते ही झोलाछाप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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तो सीएमओ के निर्देश का कोई असर नहीं
बीती 23 अगस्त को ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोहताश कुमार ने टड़ियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और इसके आसपास संचालित प्राइवेट अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया था। गोपामऊ और टड़ियावां के बीच की दूरी बामुश्किल 12 किलोमीटर है। सीएमओ ने सख्त नसीहत मातहतों को दी थी कि कहीं भी बिना पंजीकरण के अस्पताल न चलने दिए जाएं और झोलाछाप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद एक झोलाछाप के गलत इलाज से महिला और नवजात की मौत हो गई।
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