महाशिवरात्रि का त्योहार शनिवार 18 फरवरी को रात 8 बजकर 03 मिनट पर प्रारंभ होगा और इसका समापन रविवार 19 फरवरी को शाम 04 बजकर 19 मिनट पर होगा। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा निशिता काल में की जाती है, इसलिए यह त्योहार 18 फरवरी को ही मनाना उचित होगा।
ऐसे तो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। लेकिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के पावन पर्व के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिष विशेषज्ञ अनुभव त्रिवेदी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का त्योहार शनिवार 18 फरवरी को रात 8 बजकर 03 मिनट पर प्रारंभ होगा और इसका समापन रविवार 19 फरवरी को शाम 04 बजकर 19 मिनट पर होगा। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा निशिता काल में की जाती है, इसलिए यह त्योहार 18 फरवरी को ही मनाना उचित होगा।
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कालसर्प दोष का निवारण
जिन जातकों की जन्म कुंडली में कालसर्प दोष व अर्ध कालसर्प दोष होता है, उनके परिवार में अक्सर वाद-विवाद बना रहता है। उनका सारा प्रयास और परिश्रम उनके अनुरूप सफल नहीं होता। ऐसे में महाशिवरात्रि के पवन पर्व पर यदि वह शिवलिंग पर तांबे व चांदी की धातु का बना नाग अर्पित करते हैं तो राहू केतु जैसे पापी ग्रह शांत होते हैं जो इस दोष का निर्माण करते हैं।
राशिवार करें पूजन मेष: शिवलिंग को जलाभिषेक कर लाल चंदन अर्पित करें। वृष: इन जातकों को शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना लाभप्रद रहेगा। मिथुन: ऐसे जातक शिवलिंग को जलाभिषेक कर इत्र अर्पित करें। कर्क: यह जातक लाल चंदन व लाल फूल अर्पित कर महादेव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
सिंह: ऐसे जातक गेंदे के पीले फूल अर्पित करें। कन्या: किसी पावन जल में काले तिल मिला कर शिवलिंग को जलाभिषेक कराएं। तुला: शिवलिंग को जलाभिषेक कर गुलाब से निर्मित इत्र को अर्पित करे। वृश्चिक: ऐसे जातक को भांग, धतूरा व बेल का पत्ता अर्पित करना चाहिए।
धनु: शिवलिंग को जलाभिषेक कर लाल चंदन अर्पित करें। मकर: इन जातक को सफेद चंदन व मोगरा अर्पित करना चाहिए। कुंभ: शिवलिंग को जलाभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करें। मीन: ऐसे जातकों के लोग कच्चे दूध में काले तिल मिला कर शिवलिंग पर अर्पित करें।