15 हजार से शुरू हुआ सफर
तब आइडिया आया कि चाय का काम शुरू किया जाए। फिर क्या था उनसे तकरीबन 15 हजार रुपये की पूंजी खर्च कर शहर में चाय की शॉप डालने की ठान ली। अब बात आई कि दुकान का नाम क्या रखा जाए। तब उसने तय किया कि उसकी शैक्षिक योग्यता के हिसाब से शॉप का नाम एमकॉम चाय वाला ही रखा जाए।
प्रतिदिन 14 घंटे खुलती है चाय की शॉप
एमकॉम चाय वाला अब महोबा का एक ब्रांड बन गया है। शहर के नरसिंह कुटी के सामने स्थित एमकॉम चाय वाला की शॉप प्रतिदिन सुबह नौ बजे खुलती है। रात 11 बजे शॉप बंद होती है। उसकी दुकान में बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं। सुबह और शाम के समय, तो दुकान में ग्राहकों की कतारें लगी रहती हैं।
प्रतिदिन आठ से दस हजार की दुकानदारी
रवि चौरसिया ने दुकान में अब गर्मी का मौसम देखते हुए लस्सी का काम भी शुरू कर दिया है। इस समय प्रति दिन दुकान में आठ से दस हजार रुपये की दुकानदारी हो रही है। रवि अपनी चाय की दुकान से खासा संतुष्ट है। उसका कहना है कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता। कठिन परिश्रम से ही कामयाबी मिलती है।