कानपुर देहात । करीब 15 वर्ष पहले औरैया क्षेत्र के भरसेन गांव निवासी एक युवक की लूटपाट के बाद हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को अदालत ने एक आरोपी को दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्य के अभाव में एक आरोपी को दोष मुक्त कर दिया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा व विकास सिंह ने बताया कि औरैया के भरसेन गांव निवासी राघवेंद्र सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 26 जून 2008 को शाम करीब चार बजे गांव के ही पंकज अग्निहोत्री, अंकित अग्निहोत्री, ज्ञानेंद्र सिंह सेंगर व दीपू अग्निहोत्री उसके पुत्र श्याम जी उर्फ महेंद्र पाल सिंह को अपने साथ ले गए थे। पूछने पर बताया था कि वह निजी कार्य से उसे साथ लेकर जा रहे है। रात तक बेटा वापस नहीं लौटा, दूसरे दिन बेटे का शव सिकंदरा कस्बे के निन्हौरा गांव के पास खेतों में मिला। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किए थे। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही थी। दौरान सुनवाई आरोपी अंकित अग्निहोत्री व दीपू अग्निहोत्री के नाबालिग होने पर उनकी पत्रावली अलग कर दी गई थी। अन्य आरोपियों के मामले की सुनवाई आगे बढ़ गई थी। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी ज्ञानेंद्र सिंह सेंगर को दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 1.50 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं पंकज अग्निहोत्री को साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त कर दिया है।