दो रोगियों को रोशनी में हल्का दिख रहा
आराध्या आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले पांच रोगियों का गंभीर हालत में हैलट के नेत्र रोग वार्ड में इलाज चल रहा है। इनमें तीन रोगियों की हालत अधिक गंभीर है। इनकी आंख पूरी तरह खराब हो गई है। संक्रमण कम करने के लिए हाई एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।
संक्रमण खत्म हो गया,तो इनकी आंख का गोला नहीं निकालना पड़ेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान का कहना है कि रोगियों को एंटीबायोटिक दी जा रही है। संक्रमण कम हुआ है। आंखों का दर्द भी कम है। इसके अलावा दो रोगी शेर सिंह और राजाराम की आंखों को बचाने की कोशिश की जा रही है। रोशनी में उन्हें हल्का दिखाई देता है।
बोले मरीज, पांच-छह दिन बाद अस्पताल आकर दिखाया था
प्रकरण की जांच कर रही टीम का कहना है कि रोगियों ने बयान दिए हैं कि ऑपरेशन के पांच-छह दिन के बाद उन्होंने अस्पताल आकर जांच कराई थी। लेकिन वे यह नहीं बता पा रहे हैं कि उनकी जांच किसने की थी? नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता ने जांच की या उनके किसी असिस्टेंट ने रोगियों को देखा?
यह स्पष्ट नहीं हो रहा है। अगर रोगियों ने आंखों की जांच कराई थी, तो उनका ढंग से इलाज क्यों नहीं किया गया। इलाज में लापरवाही बरती गई। एसीएमओ डॉ. एसके सिंह का कहना है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट दो-तीन दिन में सौंप देगी।
यह था मामला
बर्रा स्थित आराध्या आई सेंटर की टीम ने शिवराजपुर के वीरामऊ गांव में दो नवंबर को नेत्र रोग परीक्षण शिविर लगाया था। इसमें 18 रोगी मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चिह्नित किए गए। बाद में आराध्या नर्सिंगहोम में सभी का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया। उसी दिन डिस्चार्ज कर सभी को घर छोड़ दिया गया था। इसके बाद छह मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई थी। मामले में अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।