कानपुर चिड़ियाघर गंगा नदी किनारे बसा है, इसलिए सफल प्रजनन कराने के उद्देश्य से भेजा गया है
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कानपुर चिड़ियाघर में मंगलवार को साल (बाटागुर कछुआ) प्रजाति के बीस कछुए पहुंच गए हैं। कछुओं के लिए बनाए गए तालाब में सभी को छोड़ दिया गया है। दर्शक अब इस विलुप्त हो रही प्रजाति के कछुए का दीदार कर सकते हैं। चिड़ियाघर के निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि टर्टल सर्वाइवल एलाएंस (टीएसए) के चंबल कछुआ केंद्र से चिड़ियाघर में बीच कछुए भेजे गए हैं। कछुए की विलुप्त होती 25 प्रजातियों में यह कछुआ भी सूचीबद्घ है। ये कछुए चंबल नदी में पाए जाते हैं। टीएसए और उत्तर प्रदेश वन एवं वन्यजीव विभाग इस प्रजाति के संरक्षण के लिए 2006 से परियोजना पर काम कर रहे हैं। इस प्रजाति का प्रजनन कराने के बाद गंगा नदी के संरक्षित क्षेत्रों में छोड़ जा रहा है। कानपुर चिड़ियाघर गंगा नदी किनारे बसा है, इसलिए सफल प्रजनन कराने के उद्देश्य से भेजा गया है।