बिल्लियों की यह प्रजाति संरक्षित है और पूर्वोत्तर राज्यों में पाई जाती है
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कानपुर ज़ू का आकर्षण ‘जंगली बिल्ली’ बनी हुईं हैं। गुवाहाटी चिड़ियाघर से आईं दो जोड़ी लेपर्ड कैट को चिड़ियाघर के बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां दर्शकों ने बाड़ों में आईं तेंदुए जैसी दिखने वाली बाघ बिल्लियों की अठखेलियां देखीं। एक सप्ताह तक अस्पताल में रखने के बाद दो नर और दो मादा लेपर्ड कैट को बाड़ों में डाला गया है। आकार में छोटी लेकिन देखने में तेंदुए जैसी इन तेंदुआ प्रजाति की बिल्लियों का हाव-भाव और हरकतें भी तेंदुए जैसी हैं। कानपुर जू निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि यह प्रजाति भी संरक्षित है और पूर्वोत्तर राज्यों में पाई जाती है।