बिजली कटने से सीवेज शोधन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। जल निगम (नगरीय) के अधिकारियों ने केस्को से बिजली जोड़ने के लिए लगातार अनुरोध किया और डीजल से प्लांट चलाने में बढ़ रहे खर्च का हवाला भी दिया, लेकिन देर रात तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने 354.68 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करे कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान लंबित क्यों रहा। बताया गया कि केस्को ने बकाया बिल के चलते 30 मार्च को जाजमऊ के सीवेज पंपिंग स्टेशनों की बिजली काटी थी।
इसके अगले दिन 31 मार्च को वाजिदपुर, जाजमऊ स्थित 36 एमएलडी और 5 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी प्लांट और जल निगम कॉलोनी की भी बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। जल निगम (नगरीय) के अधिशासी अभियंता अजमल हुसैन ने बताया कि 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है और केस्को के महाप्रबंधक से कनेक्शन जोड़ने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि प्लांट बंद होने के कारण गंदा पानी गंगा में जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से गंगा प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।