कानपुर में डेंगू का हमला तेज होता जा रहा है, लेकिन बचाव के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है। कोई मजबूत कार्ययोजना नहीं है। जहां संक्रमित मिलते हैं, वहीं दवा का छिड़काव करा दिया जाता है। शनिवार को रिकॉर्ड 54 रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें 37 शहर के हैं। स्वास्थ्य विभाग यह कहकर अपना बचाव करने में जुटा है कि कोई मरीज गंभीर नहीं है।
उर्सला ने शहर के 35 डेंगू संक्रमितों की रिपोर्ट दी है। इनमें सनी (22), अंशु (23), राम अवतार (35), मन्नू (22), इनाया यादव (4), दीपक (40), ब्रज (13), कार्तिक (28), राम आसरे (40), श्रेयांस तिवारी (17), रोचक शर्मा (41), ऋषभ द्विवेदी (29), हर्षित सक्सेना (28), रीना कुशवाहा (36), बेबी शिखा (2), राघवेंद्र सिंह (67), दर्शन सोमवंशी (18), अशोक कुमार (56), शालिनी श्रीवास्तव (23), दीप नारायण (36), प्रशांत कुमार (16), पूनम (38), प्रेमा देवी (62), संदीप कुमार (32), अंकित सिंह (30), पवन यादव (22), जाह्नवी तिवारी (5), सत्यदेव सिंह (35), पावनी यादव (10), दानिश (12), आबिद खान (10), वैभव यादव (10), गुड़िया पाल (27) हैं।
इसके साथ ही जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने शहर के मनोहरलाल (40), श्रीराम (65), विकास (12), बलराम (50) की रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव दी है। इसके अलावा कानपुर देहात, फतेहपुर, लखनऊ, उन्नाव, औरैया, जालौन के रोगी डेंगू पॉजिटिव आए हैं। उनका शहर के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 24 रोगी निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
डेंगू का संक्रमण फैल रहा है, लेकिन किसी रोगी की हालत गंभीर नहीं है। शहर के अस्पतालों में कुल 33 रोगी भर्ती हैं। संक्रमित जहां मिल रहे हैं, वहां टीमें भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण के साथ दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है।- डॉ. आलोक रंजन, सीएमओ
इलाज में देरी होने पर गुर्दा और लिवर हो रहे प्रभावित
सीनियर फिजीशियन डॉ. प्रदीप सहगल का कहना है कि इलाज में देर होने पर मल्टी आर्गन प्रभावित हो जाते हैं। गुर्दा, लिवर पर असर आने लगता है। अगर समय से रोगी पहुंचें तो समुचित इलाज मिल जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग की नोडल अधिकारी डॉ. लुबना खान ने बताया कि प्लेटलेट्स की उपलब्धता है। मांग बढ़ रही है। औसत 67 प्लेटलेट्स यूनिट प्रतिदिन की मांग है।