चश्मदीद गवाह -2
घटना की चश्मदीद सतिंदर कौर ने बयानों में कहा है कि 1 नवंबर 1984 को वह अपने पति रंजीत सिंह, देवर भूपेंदर सिंह, जेठ कमलजीत सिंह खनूजा के साथ गुरदयाल के मकान में किराये पर रहती थीं। भीड़ की अगुवाई करने वाला राघवेंद्र कुशवाहा असलहा लेकर मकान का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गया। फर्नीचर में आग लगा दी। देवर भूपेंदर की आंखों पर पट्टी बांधकर छत से नीचे जल रही आग में फेंक दिया। तलवार से पति रंजीत के पैर काट दिए।
चश्मदीद गवाह -3
दंगे के दौरान अपने पिता को खो देने वाले चश्मदीद गवाह परमिंदर जीत सिंह ने कहा कि वह गुरदयाल के मकान में अपने पिता रक्षपाल सिंह के साथ किराये पर रहते थे। उस दिन दंगाइयों ने घर में घुसकर लूटपाट शुरू कर दी थी। नकदी और जेवरात लूट ले गए। विरोध करने वालों को गोली मार दी। तलवार व फरसे से हाथ-पैर काट दिए। पूरी बिल्डिंग में आग लगा दी। पिता को जलती आग में फेंक दिया। जिससे उनकी मौत हो गई।
चश्मदीद गवाह -4
रणधीर सिंह, जसपाल सिंह ने बयान दिया कि उसने राजवीर, जसवंत, महिंदर और रमेश चंद्र दीक्षित को पहचाना था। त्रिलोक सिंह ने भी एसआईटी को दिए अपने बयानों में मुन्ना वाजपेई, अनिल पांडे, रवि मिश्रा, लाल सिंह, महेश तोमर, भोला पान वाला व रमेश चंद्र दीक्षित का नाम लिया था। इन्हीं गवाहों के आधार पर किदवई नगर थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित पांच आरोपियों की जमानत अर्जियां अब तक खारिज हो चुकी हैं।
दो और आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज
सिख विरोधी दंगे के आरोपी यू ब्लॉक निराला नगर निवासी 65 वर्षीय मुस्तकीम व घाटमपुर के ग्राम रामसारी निवासी 61 वर्षीय अमर सिंह उर्फ भूरा की जमानत अर्जी अपर जिला जज 17 विकास गोयल ने खारिज कर दी है। एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि दोनों को 19 जून को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आरोपों को झूठा बताते हुए उम्र के आधार पर दोनों ने जमानत स्वीकार करने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दी। चार आरोपियों की अर्जियां पहले ही खारिज हो चुकी हैं।