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Sikh Riots: आरोपियों की रिहाई पर पानी फेर रही चश्मदीदों की गवाही, दो और आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज

Wed, 03 Aug 2022 12:25 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में वर्ष 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में शहर में 127 सिखों की हत्या की गई थी। इस दौरान हुई बर्बरता का चश्मदीद गवाहों ने एसआईटी को शपथपत्र देकरआंखों देखा हाल बयां किया है।
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सिख दंगा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर सिख विरोधी दंगों के दौराना निराला रौंगटे खड़े हो जाते हैं। घटना के चश्मदीद गवाहों ने एसआईटी को शपथपत्र देकर घटना का आंखों देखा हाल बयां किया है। साथ ही दंगे में शामिल कई आरोपियों के नाम भी बताए, जिसके आधार पर 38 साल बाद आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं। इसमें कई उम्रदराज आरोपियों को अदालत से जमानत तक नहीं मिल पा रही है। इन बयानों का खुलासा जमानत पर सुनवाई के दौरान एडीजीसी संजय कुमार झा ने कोर्ट में किया है।

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 चश्मदीद गवाह -1
मकान मालिक गुरदयाल सिंह भाटिया की बेटी दलवीर कौर ने बयान में कहा कि दंगाइयों की भीड़ खून-खराबे पर अमादा थी। घर का दरवाजा तोड़कर भीड़ घुस गई। पिता को गोली मार दी। भाई सतवीर सिंह उर्फ काला पिता को उठाकर ले जा रहा था, तो उसे भी गोली मार दी। गोली के छर्रे छोटे भाई सतपाल सिंह उर्फ राजू को भी लगे। किरायेदार भूपेंद्र व रक्षपाल को आग में फेंक कर जिंदा जला दिया। गुरु इकबाल की फरसे से उंगलियां काट दीं।

चश्मदीद गवाह -2
घटना की चश्मदीद सतिंदर कौर ने बयानों में कहा है कि 1 नवंबर 1984 को वह अपने पति रंजीत सिंह, देवर भूपेंदर सिंह, जेठ कमलजीत सिंह खनूजा के साथ गुरदयाल के मकान में किराये पर रहती थीं। भीड़ की अगुवाई करने वाला राघवेंद्र कुशवाहा असलहा लेकर मकान का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गया। फर्नीचर में आग लगा दी। देवर भूपेंदर की आंखों पर पट्टी बांधकर छत से नीचे जल रही आग में फेंक दिया। तलवार से पति रंजीत के पैर काट दिए।

चश्मदीद गवाह -3
दंगे के दौरान अपने पिता को खो देने वाले चश्मदीद गवाह परमिंदर जीत सिंह ने कहा कि वह गुरदयाल के मकान में अपने पिता रक्षपाल सिंह के साथ किराये पर रहते थे। उस दिन दंगाइयों ने घर में घुसकर लूटपाट शुरू कर दी थी। नकदी और जेवरात लूट ले गए। विरोध करने वालों को गोली मार दी। तलवार व फरसे से हाथ-पैर काट दिए। पूरी बिल्डिंग में आग लगा दी। पिता को जलती आग में फेंक दिया। जिससे उनकी मौत हो गई।

चश्मदीद गवाह -4
रणधीर सिंह, जसपाल सिंह ने बयान दिया कि उसने राजवीर, जसवंत, महिंदर और रमेश चंद्र दीक्षित को पहचाना था। त्रिलोक सिंह ने भी एसआईटी को दिए अपने बयानों में मुन्ना वाजपेई, अनिल पांडे, रवि मिश्रा, लाल सिंह, महेश तोमर, भोला पान वाला व रमेश चंद्र दीक्षित का नाम लिया था। इन्हीं गवाहों के आधार पर किदवई नगर थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित पांच आरोपियों की जमानत अर्जियां अब तक खारिज हो चुकी हैं।
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दो और आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज
सिख विरोधी दंगे के आरोपी यू ब्लॉक निराला नगर निवासी 65 वर्षीय मुस्तकीम व घाटमपुर के ग्राम रामसारी निवासी 61 वर्षीय अमर सिंह उर्फ भूरा की जमानत अर्जी अपर जिला जज 17 विकास गोयल ने खारिज कर दी है। एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि दोनों को 19 जून को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आरोपों को झूठा बताते हुए उम्र के आधार पर दोनों ने जमानत स्वीकार करने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दी। चार आरोपियों की अर्जियां पहले ही खारिज हो चुकी हैं।
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