कानपुर में इंफ्लुएंजा संक्रमण नाक और गले से फेफड़ों में उतर जा रहा है। इससे रोगियों को निमोनिया हो जाता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ब्लड प्रेशर नीचे गिरता है और रोगी मल्टी ऑर्गन फेल्योर में चला जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि संक्रमण का फैलाव बहुत तेज हो रहा है। 24 घंटे के अंदर मल्टी ऑर्गन फेल होने के लक्षण आ जाते हैं। बुधवार को ऐसे ही लक्षणों वाले सात रोगियों की मौत हो गई। साथ ही हैलट और उर्सला की इमरजेंसी में 50 रोगियों को भर्ती किया गया है। ज्यादातर रोगी शॉक सिंड्रोम की हालत में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता का कहना है कि संक्रमण फेफड़ों में उतरने पर जटिल निमोनिया हो जाता है। जिनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हें अधिक जटिलताएं हो जा रही हैं। रोगी ओपीडी और इमरजेंसी दोनों जगह आ रहे हैं। बुधवार को बेकनगंज की रहने वाली अफसाना (48), किदवईनगर की रेखा (55), बगाही भट्टा के शंभू (70) की मौत हो गई।
उनके शरीर में संक्रमण फैल गया। सांस तंत्र, गुर्दों और लिवर में दिक्कत आ गई और मौत हो गई। रोगियों का इलाज गंभीर हालत में उर्सला में चल रहा था। रोगी जगदीप (47) की मौत कल्याणपुर के नर्सिंगहोम में हुई। परिजनों ने बताया कि अचानक सीने में जकड़न के बाद सांस में दिक्कत हुई थी। इसके अलावा एक रोगी चेस्ट हॉस्पिटल और दो रोगी हैलट इमरजेंसी में मृत हालत में आए हैं। चेस्ट हॉस्पिटल आए देवेश (52) पहले से सीओपीडी रोगी रहे हैं। वायरल संक्रमण होने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ी। इसके अलावा नवाबगंज से विनोद (47) और चौबेपुर के रंजीत (52) के हैलट पहुंचने के पहले मौत चुकी थी। परिजनों ने बताया कि सांस फूल रही थी और पेशाब रुक गई। चेस्ट हॉस्पिटल के रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय वर्मा के मुताबिक अस्पताल का आईसीयू रोगियों से फुल है। इसके अलावा रोगियों को गंभीर हालत में अस्पतालों की इमरजेंसी में भर्ती किया गया है।
ऐसे करें बचाव
- बासी खाना न खाएं, गरिष्ठ भोजन से बचें।
- सादा पौष्टिक भोजन, सलाद और मौसमी फल लें।
- पहले से सांस रोगी एहतियात बरतें।
- दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- बाहर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाएं तो मास्क लगा लें।
- गुर्दा और लिवर रोगी खासतौर पर सतर्क रहें।