तीनों फर्मों का काम पीयूष अपने भाई अम्ब्रीष के साथ मिलकर देखता है। छापेमारी के दौरान पीयूष के कन्नौज और आनंदपुरी स्थित घर से 196.58 करोड़ रुपये नकद और 23 किलो सोना भी बरामद हुआ था। जीएसटी चोरी मामले में डीजीजीआई अहमदाबाद ने कोर्ट में पीयूष के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया था।
तो सोना तस्करी के आरोप में डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) लखनऊ ने भी एक अलग परिवाद दर्ज कराया है। दोनों मामलों में पीयूष के खिलाफ चार्जशीट तो कोर्ट में दाखिल कर दी गई है लेकिन विवेचना जारी रहने की बात भी कही गई है।
लगभग आठ माह जेल में रहने के बाद पीयूष को दोनों मामलों में हाईकोर्ट से जमानत भी मिल गई। पीयूष कर, ब्याज और जुर्माने के रूप में 54.09 करोड़ रुपये जमा कर चुका है। अब कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई और गवाही शुरू होनी है, लेकिन पिछली कई तारीखों से अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच इस मुद्दे पर बहस चल रही है।
बहस ये है कि पीयूष के खिलाफ विवेचना खत्म मानकर सुनवाई शुरू हो या विवेचना जारी रखने के साथ ही मुकदमे की कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जाए। विशेष लोक अभियोजक अम्ब्रीष टंडन ने बताया कि पीयूष को 12 दिसंबर तक नोटिस का जवाब देने को कहा गया था लेकिन पीयूष ने जवाब के लिए और समय मांगा है।
अभियोजन पीयूष जैन के मामले में कोर्ट में गवाही शुरू करना चाहता है। पीयूष के खिलाफ किसी थाने में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है बल्कि परिवाद दर्ज कराया गया है। कानूनन परिवाद में गवाही तभी शुरू होती है जब अभियुक्त के खिलाफ विवेचना खत्म मानी जाती है। अभियोजन विवेचना जारी रहने की बात कह रहा है और मुकदमे की सुनवाई भी शुरू करना चाहता है। दोनों ही विरोधाभासी हैं। पिछली कई तारीखों से इसी मुद्दे पर कोर्ट में बहस चल रही है। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही गवाही शुरू होगी। -चिन्मय पाठक, पीयूष के अधिवक्ता
विभागीय कार्रवाई और न्यायिक कार्रवाई दोनों अलग-अलग बातें हैं। पीयूष के मामले में विभागीय कार्यवाही अभी चल रही है। उसके व्यापार और लेनदेन के हिसाब-किताब के आधार पर उसकी कर देयता का निर्धारण किया जाएगा। पीयूष ने कर चोरी की है। यह बात उसने खुद अपने बयान में मानी है और 54 करोड़ रुपये भी सरकारी खजाने में जमा कराए हैं। ऐसे में उसके अपराध के लिए न्यायिक कार्यवाही की जा रही है। खुद को सजा से बचाने के लिए कानूनी पैतरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। -अम्ब्रीष टंडन, विशेष लोक अभियोजक