पर्याप्त संसाधन न होने से हुई दिक्कत
शहर में आठ फायर स्टेशन होने के बाद भी बड़ी आग से निपटने के पर्याप्त संसाधन न होने के कारण अग्निशमन विभाग को बड़ी नाकामी का सामना करना पड़ा। शनिवार को फिर से अधिकारी का एक बयान मीडिया के सामने आया, जिसमें बताया कि आग पर करीब 95 प्रतिशत तक काबू पाया जा चुका है।
लोगों के घर तक खाला कराने पड़े
जबकि, आग फिर से भड़क जाने के बाद लोगों के घर तक खाली कराने पड़ गए। अग्निशमन विभाग की ओर से प्रत्येक साल अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान अग्निशमन विभाग बाजारों, स्कूलों, संस्थानों में पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का काम करते हैं।
व्यापारी बोले- कभी नहीं कोई मॉकड्रिल
शहर की सबसे बड़ी थोक कपड़ा मार्केट की तरफ कभी किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। व्यापारियों के अनुसार कभी भी विभाग की ओर से कोई मॉकड्रिल तक नहीं की गई। यहां आग लगने पर अग्निशमन विभाग की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं थी।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को सौंपी जिम्मेदारी
यही कारण रहा कि पहले आग को हल्के में लिया गया और जब बाद में आग ने विकराल रूप लिया, तो संसाधनों के अभाव में विभाग लाचार नजर आया। पूर्ण रूप से आग बुझाने की जिम्मेदारी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के कंधों पर सौंपनी पड़ी।
व्यापारियों में रही लापरवाही की चर्चा, रोष
व्यापारियों में इस लापरवाही की चर्चा रही कि यदि फजलगंज में खड़ा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म कंडम न होता तो आग को गुरुवार रात को ही काबू में किया जा सकता था। जब तक अधिकारी जागे तब तक काफी देर हो चुकी थी। लखनऊ से शुक्रवार हाईड्रोलिक प्लेटफार्म आने के बाद आग बुझाने के सही मायनों के प्रयास शुरू किए गए।
देरी होने से बिगड़ गई थी स्थिति
तब तक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि सिर्फ एक हाइड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी भी कम पड़ गई। शुक्रवार रात को प्रयागराज और रविवार को आगरा से भी एक हाईड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी मंगवानी पड़ गई। लापरवाही को लेकर व्यापारियों में रोष भी देखने को मिला।
शहर के हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मरम्मत कराने के लिए मुख्यालय से बात की गई है। अग्निशमन विभाग को शहर में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे आगे कभी ऐसी स्थिति आने पर समय रहते स्थितियों को काबू किया जा सके। -आनंद प्रकाश तिवारी, जेसीपी, कानपुर