वहीं, मोनू उर्फ शशिकांत पांडेय व शिव तिवारी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाने से उनके नाम हटा दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में पुलिस की तरफ से रिचा दुबे के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने पर कोई राहत नहीं दी।
साथ ही सात दिन में निचली अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया। सात दिन बाद भी अदालत में हाजिर नहीं होने पर एंटी डकैती कोर्ट ने रिचा दुबे के खिलाफ वारंट जारी कर दिया।
वहीं, रिचा दुबे के अधिवक्ताओं सीपी शुक्ला व पवनेश कुमार शुक्ला ने एंटी डकैती कोर्ट के समक्ष मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती देते हुए तर्क रखा कि यह मामला स्पेशल कोर्ट एंटी डकैती में नहीं चलाया जा सकता है। इसकी सुनवाई का क्षेत्राधिकार निचली अदालत को है।
इसके बाद मामला फिर लटक गया। इसी बीच बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत याचिका जिला जज की अदालत में दाखिल की, जो निरस्त हो गई। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई कर कोर्ट ने मंगलवार को रिचा दुबे की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली थी। शुक्रवार को रिचा दुबे अपने अधिवक्ताओं के साथ एंटी डकैती कोर्ट चंद्रमणि मिश्रा की अदालत में पेश हुईं और हाईकोर्ट के आदेश को दाखिल किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सीपी शुक्ला व पवनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि एंटी डकैती कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रिचा दुबे को 80-80 हजार रुपये की दो जमानतें दाखिल करने के आदेश दिए। साथ ही मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में हाजिर रहने के आदेश दिए हैं। अदालत में जमानतें दाखिल कर दी गई है। अब मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी।